जिस वक्त यह हादसा हुआ, मृतक छात्र का बड़ा भाई वैभव मिश्रा पुणे में था। वह वहीं रहकर पढ़ाई कर रहा है। भाई की मौत की खबर मिलते ही वह स्तब्ध रह गया। फ्लाइट से शाम करीब 4.30 बजे शहर पहुंचने के बाद उसे रसूलाबाद घाट ले जाया गया। भाई का शव देखते ही वह बिलख पड़ा। परिजनों ने किसी तरह उसे संभाला और फिर उसने ही शव को मुखाग्नि दी।
कैसे हुआ हादसा, नहीं मिल पाई जानकारी
पुलिस का कहना है कि जब तक दुर्घटनाग्रस्त कार नदी से बाहर नहीं निकाली जाती, यह पता लगाना बहुत कठिन है कि हादसे की वजह क्या रही। 15 नंबर पीपा पुल के पास सीसीटीवी कैमरा भी लगा हुआ है। हालांकि इसकी फुटेज देखने से भी वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। दरअसल यहां एक मूविंग कैमरा लगा है, जो नियमित अंतराल पर चारों ओर घूमता रहता है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि जिस वक्त कार नदी मेें गिरी, कैमरे का लेंस पीछे की ओर था। यही वजह है कि फुटेज में गाड़ी नदी में गिरते हुए नहीं दिख रही है।
हादसे के बाद एनडीआरएफ के जवानों की मुस्तैदी ही थी कि एक युवक की जान बचाई जा सकी। सूचना मिलने के तुरंत बाद ही डिप्टी कमांडेंट पीएल शर्मा के नेतृत्व में इंस्पेक्टर सचिन नलवाडे 15 जवानों की टीम लेकर मौके पर पहुंचे और डूबे युवकों को बाहर निकालने के लिए नदी में उतर गए।
रात का वक्त और पानी का बहाव बहुत तेज होने के चलते उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा इसके बावजूद जवानों ने प्रशांत को बाहर निकाल लिया। बदकिस्मती से तेज बहाव की चपेट में आकर अभ्युदय बहते हुए 14 नंबर पीपा पुल के पास पहुंच गया। जब तक उसे बाहर निकाला जाता, बहुत देर हो चुकी थी।
कुंभ मेला से जुड़े अफसर भले ही कुंभ की दिव्यता व भव्यता के दावे करते न थक रहे हों लेकिन, हादसे के बाद उपजे हालात कुछ और ही कहानी कहते हैं। हाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी मेला प्रशासन इस स्थिति मेें नहीं है कि दुर्घटना की स्थिति में नदी में गिरे वाहन को बाहर निकाला जा सके। रविवार रात नदी में गिरी एसयूवी को दिन भर की मशक्कत के बाद भी बाहर नहीं निकाला जा सका। इससे पहले 26 दिसंबर की रात हुए हादसे में पीपा पुल 12 से नदी में गिरे ट्रक को करीब दो महीने बाद भी बाहर नहीं निकाला जा सका है। इस हादसे में खलासी फरियाद(18) निवासी मुजफ्फरपुर की मौत भी हो गई थी।
कुंभ मेला से जुड़े अफसर भले ही कुंभ की दिव्यता व भव्यता के दावे करते न थक रहे हों लेकिन, हादसे के बाद उपजे हालात कुछ और ही कहानी कहते हैं। हाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी मेला प्रशासन इस स्थिति मेें नहीं है कि दुर्घटना की स्थिति में नदी में गिरे वाहन को बाहर निकाला जा सके।
रविवार रात नदी में गिरी एसयूवी को दिन भर की मशक्कत के बाद भी बाहर नहीं निकाला जा सका। इससे पहले 26 दिसंबर की रात हुए हादसे में पीपा पुल 12 से नदी में गिरे ट्रक को करीब दो महीने बाद भी बाहर नहीं निकाला जा सका है। इस हादसे में खलासी फरियाद(18) निवासी मुजफ्फरपुर की मौत भी हो गई थी।