बचाओ-बचाओ की आवाज सुनकर वह लोग घटनास्थल पर पहुंचे तो दो लोगों को कुल्हाड़ी तथा गड़ासे आदित्य को मारते देखा। होमगार्डों को देखकर अभियुक्तगण मौके से भाग गए। होमगार्ड मुन्ना सिंह ने अज्ञात में रिपोर्ट लिखाई। उसने बताया कि उसने अभियुक्तों को टार्च और बिजली की रोशनी में देखा है तथा सामने आने पर पहचान सकता है।
विवेचना में पुलिस ने अरविंद सिंह, बुबुआ और सुनील सिंह के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बबुआ फरार हो गया इसलिए उसकी फाइल अलग कर दी गई जबकि सुनील सिंह को ट्रायल कोर्ट ने हत्या और आपराधिक षडयंत्र के आरोप से बरी कर दिया।
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अरविंद सिंह को हत्या के आरोप में उम्रकैद और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इसके खिलाफ दाखिल अपील पर विचार करने के उपरांत हाईकोर्ट ने कहा कि अभियुक्त के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्यों से उसके द्वारा अपराध किया जाना साबित नहीं होता है। किसी भी चश्मदीद गवाह ने घटना को अपनी आंखों के सामने होते नहीं देखा है।
वादी मुकदमा होमगार्ड मुन्ना सिंह पक्षद्रोही हो गया। उसने कहा कि घटना के वक्त बारिश हो रही थी और अंधेरा था। पुलिस जांच में हत्या करने का उद्देश्य साबित नहीं होता है। दोनों पक्षों के बीच किसी प्रकार की दुश्मनी, गुटबाजी या लड़ाई झगड़े की बात सामने नहीं आई है। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त हथियार गड़ासा और कुल्हाड़ी भी बरामद नहीं किया है। ऐसे में अभियुक्त पर लगाए गए आरोप संदेह से परे साबित नहीं होते हैं।