रोजाना औसतन पांच से छह नए संक्रमित इसके सामने आ रहे हैं। कई मामलों में संक्रमण के सोर्स का पता नहीं चल सका है। इससे संकट गहरा गया है। हालांकि, रिकवरी रेट दो तिहाई के आसपास भी पहुंच चुका हैं। इससे थोड़ी राहत भी महसूस भी हैं।
जिले में कोरोना का संक्रमण सबसे पहले शाहगंज स्थित तब्लीगी जमात के मुसाफिर खाने में रह रहे इंडोनेशियाई नागरिक में मिला था। इसके बाद शिवकुटी फिर लूकरगंज के इंजीनियर कैसे संक्रमित हुआ यह आज तक पता नही चल पाया। जबकि, इंजीनियर से उसकी फेमिली और घर में काम करने वाले कुल सात लोग पॉजिटिव हुए।
इसके बाद से शहर में कोरोना के संक्रमण का दायरा बढ़ता गया। करेली की महिला, उसी इलाके का चोरी करने वाला युवक, मीरापुर का कारोबारी, शाहगंज नखासकोहना स्थित, रामबाग, हटिया बहादुरगंज, सिविल लाइंस, अल्लापुर, दारागंज, कालिंदीपुरम, लोकनाथ, मुट्ठीगंज, मालवीयनगर, अशोकनगर, चकिया, सुलेम सराय, ट्रांसपोर्टनगर, रानीमंडी का कोलहनटोला, अकबरपुर, ओल्ड कटरा, एसएसपी, कार्यालय, एसएसपी आवास, झलवा के पास स्थित आईटीबीपी कार्यालय, जीआरपी ऑफिस, बीएसएनएल में काम करने वाले लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं।
आधा दर्जन से अधिक मामले ऐसे हैं, जिसमें सोर्स का पता नहीं अभी तक नहीं चल सका है। इससे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की चिंताएं बढ़ गईं हैं। अनुमान यही लगाया जा रहा है कि जो हालात हैं उसमें संक्रमण के मामले अभी और बढ़ेंगे।
नैनी, झूंसी, फाफामऊ में लगातार मिल रहे संक्रमित
शहर के साथ नैनी, झूंसी और फाफामऊ में भी कोरोना के संक्रमित मामले लगातार मिल रहे हैं। झूंसी इलाके में एक दर्जन से अधिक मामले सामने आए हैं जबकि फाफामऊ और नैनी, दोनों इलाकों में ही 10 के आसपास कोरोना संक्रमित मिले हैं। हालांकि इन इलाकों से जो भी मामले सामने आए हैं। सभी की टूर हिस्ट्री है और एक-दो को छोड़कर सभी घर चले गए हैं।