‘आस्क’ यानी एटीट्यूड, स्किल और नॉलेज, इस सिद्धांत को अपने जीवन में उतारें, इसका पालन करें, आपको लक्ष्य पाने से कोई नहीं रोक सकता। कोई भी कंपनी हो, नौकरी देने से पहले छात्र-छात्राओं में इन्हीं गुणों को तलाशती है और अगर ये गुण हैं तो लक्ष्य जरूर मिलेगा। यह बात इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के प्लेसमेंट अफसर शाश्वत ने शुक्रवार को ‘अमर उजाला’ के अपराजिता अभियान के तहत आर्य कन्या में आयोजित करियर काउंसलिंग कार्यक्रम में कही।
बतौर मुख्य वक्ता शाश्वत ने छात्राओं को करियर बनाने के लिए प्रेरित किया और सफलता के मंत्र दिए। कहा, जब आप इंटरव्यू के लिए जाते हैं तो कंपनियों में बाहर सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं जो आपका एटीट्यूड, चलने, उठने, बैठने के तरीके आदि पर नजर रखते हैं। स्किल का मतलब कोई भी ऐसा गुण, जो आपको व्यक्तिगत तौर पर दूसरोें से अलग करता है और हर शख्स में यह होता है, बस उसे पहचाने, परखने की जरूरत है। जहां तक नॉलेज की बात है तो इसके लिए शिक्षण संस्थान हैं और बाकी नॉलेज अनुभव से आती है।
उन्होंने कॉमर्स की छात्राओं से कहा कि केपी ट्रेनिंग कॉलेज में जीएसटी का एक कोर्स शुरू हुआ है। कोर्स पूरा करने पर सर्टिफिकेट मिलता है। आप दूसरों के लिए जीएसटी फाइल कर सकती हैं। इसे आय का माध्यम बना सकती हैं। यह तो एक छोटा सा उदाहरण है। रास्ते ढेरों हैं। हमारे यहां नौकरी है लेकिन स्किल की कमी है, इसलिए पद खाली रह जाते हैं। कार्यक्रम की शुरुआत में कॉलेज की प्राचार्य डॉ. रमा सिंह ने मुख्य वक्ता का स्वागत किया और ‘अमर उजाला’ के अभियान की सराहना करते हुए छात्राओं से कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज के लिए उदाहरण बनें। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रंजना त्रिपाठी एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. इभा सिरोठिया ने किया। अंत में प्राचार्य डॉ. रमा सिंह ने सभी को अपराजिता अभियान के तहत नारी सशक्तिकरण की शपथ दिलाई।
‘फोर-सी’ भी है सफलता का मंत्र
प्लेसमेंट अफसर शाश्वत ने ‘फोर-सी’ पर जोर देकर कहा कि छात्राएं इस सिद्धांत का भी पालन, क्योंकि सफलता के लिए यह सबसे जरूरी है। ‘फोर-सी’ यानी क्रिटिकल थिंकिंग, कम्युनिकेशन, कोलेबोरेशन एवं क्रिएटिविटी, जो किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए जरूरी है। उन्होंने कम्युनिकेशन के बार में छात्राओं को सरल तरीके से समझाया। कहा कि कम्युनिकेशन का मतलब केवल भाषा नहीं, बल्कि आपकी बॉडी लैंग्वेज, आंखों से अपनी बात कहने का तरीका, उठने, बैठने, चलने का तरीका, हैंड मूवमेंट जैसी चीजें भी कम्युनिकेशन को बेहतर और मजबूत बनाती हैं।