गंगा यमुना का जलस्तर बढ़ने के साथ ही एनडीआरएफ को अलर्ट मोड में रहने को कह दिया गया था। इसी क्रम में बाढ़ से निपटने के लिए वाराणसी स्थित 11 एनडीआरएफ ने कमर कस ली। प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर सात टीमों को संसाधनों एवं मोटर बोट के साथ भेज दिया गया। रविवार को छोटा बघाड़ा, बड़ा बघाड़ा, सलोेरी, बेली आदि इलाकां में फंसे लोगों को निकालने के लिए एनडीआरएफ निरीक्षक शिवराज पी के नेतृत्व में 25 सदस्यीय टीम मौके पर पहुंच गई। प्रशिक्षित गोताखोर, मोटर बोट, लाइफ जैकेट एवं अन्य उपकरणों से लैस जवान दिन भर राहत एवं बचाव अभियान में जुटे रहे। इस दौरान 200 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। एनडीआरएफ की टीम में शामिल चंदन सिंह, संजय गुप्ता, सौरभ कुमार आदि कई बुजुर्ग, बच्चों एवं महिलाओं को सहारा देकर उनके मकान से सीधे बोट में उतारा। इस बीच तमाम लोग ऐसे भी रहे जो अपने घर से निकलने को तैयार नहीं थे। कुछ को समझा बुझाकर निकाला भी गया। तब भी कुछ लोग ऐसे रहे जो चोरी की आशंका से अपने घर से निकलने को तैयार नहीं हुए।
अफसरों के साथ डीएम ने लिया बाढ़ का जायजा
प्रयागराज। बाढ़ प्रभावित मोहल्लों का जिलाधिकारी भानु चंद्र गोस्वामी ने रविवार को अफसरों के साथ जायजा लिया। एडीएम वित्त एमपी सिंह और एसडीएम सदर के साथ वे राहत शिविरों में भी गए। उन्होंने बाढ़ में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने को कहा। इस बीच जिला प्रशासन की ओर से भी 12 नाव सदर तहसील में, चार नाव फूलपुर तहसील में एवं एक नाव मेजा तहसील में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए लगवा दी गई। ऋषिकुल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में रह रहे लोगों से भी डीएम ने मुलाकात की। उन्होंने शिविर में मौजूद कर्मचारियों से कहा कि शिविर में रह रहे लोगों को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। डीएम बख्शी बांध भी गए। डीएम ने कहा कि बाढ़ को लेकर प्रशासन पूरी तरह से चौकस है। अन्य क्षेत्रों में भी जलभराव की स्थिति को लेकर फोकस रखा गया है।
गऊघाट में नाव में ही मल्लाहों ने बना लिया आशियाना
0 यमुना किनारे गऊघाट मोहल्ले में यमुना का जलस्तर बढ़ने एवं उसके किनारे मकानों में बाढ़ का पानी आने के बाद वहां रह रहे तमाम मल्लाहों ने अपने घर से जरूरी सामान निकालकर नाव में ही रख लिया। घर से नाव को बांधने के साथ ही मल्लाहों ने उसी में अपना आशियाना बना लिया।