चौक में रहने वाले बुजुर्गों को आज भी याद है कि 1962 के लोकसभा चुनाव में लाल बहादुर शास्त्री चौक की तंग गलियों में दिनभर पैदल घूमकर प्रचार किया करते थे। 1962 में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव भी हुए थे और इलाहाबाद सिटी साउथ विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर बैजनाथ कपूर चुनाव लड़ रहे थे। शास्त्री अपने साथ बैजनाथ के लिए भी वोट मांगा करते थे। जनता ने लाल बहादुर शास्त्री को तो स्वीकारा, लेकिन बैजनाथ का नकार दिया और वह चुनाव हार गए।
बैजनाथ कपूर के लिए शास्त्री खुद प्रचार कर रहे थे लेकिन प्रचार के दौरान ही वोटरों ने संकेत दे दिए थे कि उन्हें शास्त्री तो स्वीकार हैं लेकिन बैजनाथ नहीं। नतीजा कि इस सीट से प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से चुनाव लड़े कल्याण चंद मोहिले उर्फ छुन्नन गुरू 1891 वोटों से जीत गए लेकिन जनता ने लाल बहादुर शास्त्री को जबर्दस्त समर्थन दिया और उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर इलाहाबाद संसदीय सीट से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जनसंघ के प्रत्याशी राम गोपाल संड को 68 हजार 533 मतों के भारी अंतर से पराजित किया। शास्त्री को चुनाव में एक लाख 73 हजार 324 और रामगोपाल को 68 हजार 791 वोट मिले थे।
1962 के चुनाव में जवाहर लाल नेहरू फूलपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़े और इस चुनाव में उन्होंने राम मनोहर लोहिया को 64 हजार 571 मतों के भारी अंतर से पाराजित किया। जीत का यह अंतर कुल पड़े वोटों का 33.46 फीसदी था। जीत के बाद नेहरू के प्रस्ताव बाबू गौरीशंकर श्रीवास्तव ने नेहरू को शुभकामना संदेश भेजा तो नेहरू ने भी पत्र भेजकर धन्यवाद दिया और कहा कि गौरीशंकर भी उन्हें नामित करने वालों में से एक थे, सो इस जीत के लिए वह भी शुभकामना के बराबर से हिस्सेदार हैं।
सिर्फ इतना ही नहीं, बाद में उन्होंने बाबू गौरीशंकर को दिल्ली के तीन मूर्ति भवन बुलाया और वहां व्यक्तिगत रूप से मिलकर उन्हें धन्यवाद दिया। गौरीशंकर के पुत्र जवाहर श्रीवास्तव के अनुसार उनके पिता बताया करते थे कि चुनाव की पूरी रणनीति आनंद भवन में तैयार होती थी। जवाहर श्रीवास्तव बताते हैं कि नेहरू रिश्ते निभाना जानते थे और इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि उनके पिता के प्रस्ताव पर ही नेहरू ने इलाहाबाद में इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज की स्थापना की थी।
962 में चायल नाम से नई संसदीय सीट का गठन हुआ। 1962 में विधानसभा के चुनाव भी लोकसभा चुनाव के साथ हुए और विधानसभा चुनाव में भी चायल नाम से सीट बनाई गई। 1951 और 1957 के चुनाव में नेहरू के साथ चुनाव जीतने वाले कांग्रेस के मसुरियादीन 1962 के चुनाव में चायल संसदीय सीट से लड़े और उन्होंने जनसंघ के पन्ना लाल को 33 हजार 879 मतों से पराजित किया। हालांकि चायल विधानसभा सीट पर कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा। वहां से प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चौधरी नौनिहाल सिंह चुनाव जीते थे और उन्होंने कांग्र्रेस प्रत्याशी कमल कुमार गोइंदी को 4586 वोटों से हराया था।