हेमा जोशी का साहित्य बांसुरी जैसा, बिना वक्त दिए इसका मर्म जान पाना मुश्किल
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अंग्रेजी विभाग की सेवानिवृत्त प्रोफेसर हेमा जोशी की पुस्तक '' दो पलकों की छांव में'' का विमोचन फिल्म सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने किया। उन्होंने इस कविता संग्रह को रचनाकार की साहित्य साधना की महक बताया। कहा कि इनकी कविताओं में सूक्ष्म प्रेम के प्रतिबिंब बरबस ध्यान खींचते हैं।
सिविल लाइंस स्थित एलचिको रेस्टोरेंट के सभागार में मुख्य अतिथि प्रसून जोशी ने कहा कि प्रो.हेमा जोशी से इस संग्रह की कहानी बताती है कि यह कितनी धीमी आंच पर पका हुआ लेखन है। इसमें कच्चापन बिल्कुल नहीं है। उनके साहित्य की तुलना बांसुरी से की। कहा कि इस साहित्य का मर्म समझने के लिए समय निकालना पड़ेगा। प्रो.एलआर शर्मा ने डॉ.के जमीनी जुड़ाव और सादगी की चर्चा की।
लेखिका नीलम सरन गौड़ का कहना था कि हेमा की रचनाओं में जीवन का दर्शन दिखाई देता है। प्रो.हेरम्ब चतुर्वेदी ने इस पुस्तक को पुराने अतीत पर नए कलेवर की संज्ञा दी। इससे पहले साहित्यकार अनुपम परिहार ने प्रसून जोशी को सरस्वती पत्रिका का अंक भेंट किया। इस मौके पर मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, हेमा की बड़ी बहन प्रो.नलिनी पंत आदि रहे।