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High Court : 'अनुच्छेद 161 विवेकाधीन लेकिन मनमाना नहीं', समय पूर्व रिहाई पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी

Tue, 18 Aug 2026 02:44 PM IST
अनुज कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्यपाल की समय से पहले रिहाई की शक्ति पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने सरकार को राम प्रताप सिंह की अर्जी पर एक महीने में नए सिरे से फैसला लेने का आदेश दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत समय से पहले रिहाई देने की शक्ति राज्यपाल की सांविधानिक तौर पर विवेकाधीन शक्ति है, लेकिन इसका इस्तेमाल मनमाने ढंग से नहीं किया जा सकता। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने फतेहपुर जेल में बंद राम प्रताप सिंह की याचिका पर की।

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याची ने राज्यपाल के पास समय से पहले रिहाई देने की गुहार लगाई थी, जिसे ठुकरा दिया गया। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की सिफारिशें मनमानी राय पर आधारित थी। उनकी रिपोर्ट पर भरोसा कर राज्यपाल की ओर से याची की समय पूर्व रिहाई की मांग खारिज कर दी गई। इसी के साथ हाईकोर्ट ने सरकार को याची की अर्जी पर एक महीने में नए सिरे से फैसला लेने का आदेश दिया है।

मामले के मुताबिक, याची को 2002 में फतेहपुर के अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने हत्या के प्रयास का दोषी करार देते हुए सात साल की कठोर कारावास और दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। करीब आधी सजा भुगत लेने के बाद याची ने राज्यपाल से समय पूर्व रिहाई की गुहार लगाई।

जेल रिपोर्ट के मुताबिक, वह बिना छूट के चार साल, छह माह और छह दिन जेल में रह चुका है। छूट जोड़ने पर यह अवधि पांच वर्ष चार माह थी। जेल में उसका आचरण संतोषजनक दर्ज किया गया। इसके बावजूद उसकी मांग को ठुकरा दिया गया। राज्यपाल की ओर से पारित आदेश में उसकी वास्तविक जेल अवधि महज दो वर्ष छह दिन बताई गई थी।
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इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने राज्यपाल की ओर से जारी आदेश को जेल में बिताई गई वास्तविक अवधि की गलत गणना का परिणाम माना। इस पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई। कोर्ट ने पाया कि डीएम और एसपी की प्रतिकूल सिफारिशों के आधार पर रिहाई से इन्कार किया गया था। जबकि, प्रतिकूल प्रविष्टियां ठोस बुनियाद पर नहीं दिख रही थी। कोर्ट ने कहा कि बिना छूट एक-तिहाई सजा भुगत लेने के बाद कैदी समय पूर्व रिहाई का हकदार हो जाता है।

समय पूर्व रिहाई की प्रक्रिया
कैदी की समय पूर्व रिहाई के लिए जेल प्रशासन एक प्रस्ताव तैयार करता है। इसमें कैदी का अच्छा आचरण, काटी गई सजा की अवधि और अपराध की प्रकृति का विवरण होता है। यह प्रस्ताव जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पास उनकी सिफारिशों के लिए भेजा जाता है। इसके बाद फाइल राज्य सरकार या संबंधित सक्षम प्राधिकारी के पास जाती है। नियमों के तहत पात्रता पूरी होने पर राज्यपाल की ओर से अंतिम निर्णय लिया जाता है।
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