इलाहाबाद। माघ मेला में दूसरा स्नान पर्व 24 जनवरी को पौष पूर्णिमा का होगा। पहले जल स्तर बढ़ने और उसके बाद हुई बारिश के बाद मेला क्षेत्र में सबकुछ अस्त-व्यस्त हो गया है। घाटों पर फिसलन है और आसपास की जमीन दलदली हो गई है। चकर्ड प्लेटें उखड़ी पड़ी हैं और गाटा मार्ग भी खराब हो गए है। पौष पूर्णिमा पर लाखों स्नानार्थी मेला क्षेत्र में पहुंचेंगे, सो स्नान पर्व से पहले मेला प्रशासन सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में जुट गया है।
सबसे खराब हालत घाटों की है। स्नान के लिए मेला प्रशासन की ओर से 7200 रनिंग फीट के कुल 14 घाट बनाए गए थे। कुछ दिनों पहले गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण संगम घाट सहित कई घाटों का बड़ा हिस्सा डूब गया। अभी इस समस्या से निजात भी नहीं मिली थी कि 19 जनवरी को दिनभर जमकर बारिश हुई। ऐसे में घाटों की सूरत और बिगड़ गई। बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान गाटा मार्गों को हुआ। चकर्ड प्लेटें अपनी जगह से खिसक गईं और गाटा मार्ग दलदल बन गए। मेला क्षेत्र के मुख्य मार्ग भी अस्त-व्यस्त हो गए। साथ ही कई शिविरों में पानी घुस गया। इसके अलावा मेला क्षेत्र में बने ज्यादातर शौचालय और मूत्रालय भी ध्वस्त हो गए, जिससे बड़े पैमाने पर गंदगी फैल गई।
इन तमाम समस्याओं से निपटने के लिए मेला प्रशासन के पास सिर्फ दो दिन का समय है, क्योंकि 24 जनवरी को पौष पूर्णिमा का मुख्य स्नान पर्व है और उस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम क्षेत्र पहुंचेंगे। फिलहाल मेला प्रशासन ने मेला क्षेत्र में सुधार के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू करा दिया है। घाटों और गाटा मार्गों की मरम्मत कराई जा रही है। दलदली जमीन पर बालू डालकर स्थिति में सुधार किया जा रहा है।
साथ ही चकर्ड प्लेटें जोड़ने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को लगाकर ध्वस्त पड़े शौचालयों और मूत्रालयों की मरम्मत का भी काम भी शुरू करा दिया गया है। जल निगम के अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि जहां भी जल भराव की स्थिति अब तक बनी हुई है, वहां तत्काल नाली बनाकर या पंप के जरिये जल निकासी की व्यवस्था की जाए।