देश के लोगों के बीच वैमनस्यता पैदा करते हैं इस तरह के पोस्ट
आवेदक के वकील ने दलील दी कि आवेदक निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया गया है। उन्होंने यह भी प्रस्तुत किया कि प्रधानमंत्री, विंग कमांडर के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट आवेदक ने नहीं किए थे। शासकीय अधिवक्ता ने जमानत याचिका का विरोध किया। कहा, सोशल मीडिया पर इस तरह के पोस्ट भारत के लोगों के बीच वैमनस्यता पैदा करते हैं और भारतीय सेना-वायुसेना के प्रति अनादर दिखाते हैं।
कोर्ट ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई व्यक्ति भारत के प्रधानमंत्री, भारतीय सेना और उसके अधिकारियों का अनादर करते हुए वीडियो अपलोड करे।