प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि गंगा जल पीने लायक नहीं है हालांकि इससे नहाया जा सकता है। 17नाले गंगा व 25 नाले यमुना में गिर,रहे है। जबकि डीएम की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि कोई भी नाला बिना शोधित किए सीधे गंगा और यमुना में नहीं गिर रहा है।
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न्यायमित्र गुप्ता ने 2011 में गंगा में न्यूनतम 50 फीसदी जल प्रवाह रखने के केन्द्र सरकार को दिए गएये निर्देशों का पालन न करने की तरफ कोर्ट का ध्यान खींचा।और कहा कि गंगा बेसिन अथॉरिटी गंगा बेसिन को संरक्षण देने की परियोजना पर विचार कर रही है। कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र सरकार से रिपोर्ट मांगी है।