स्टांप एवं उड्डयन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी से पांच करोड़ की रंगदारी मांगने वाले का आखिरकार पता चल गया। हमीरपुर के रहने वाले इस शख्स की तलाश में पुलिस टीम ने वहां पहुंचकर दबिश दी लेकिन वह नहीं मिला। फिलहाल उसकी तलाश जारी है।
मंत्री नंदी को फोन पर धमकी देेकर पांच करोड़ की रंगदारी मांगने का मामला तीन दिन पहले सामने आया था। उनके वकील सुभाष बाजपेयी की ओर से दी गई तहरीर में बताया गया था कि 12 मई को दोपहर 12.10 बजे मंत्री के प्राइवेट नंबर पर अज्ञात नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले ने गालीगलौच करते हुए पांच करोड़ रंगदारी मांगी। कुछ देर बाद उसी नंबर से एक मैसेज भी आया। कोतवाली पुलिस मुकदमा दर्ज कर जांच में जुटी थी। सर्विलांस व मोबाइल कंपनी से रिकॉर्ड मिलने के बाद पुलिस टीम ने बांदा में छापा मारा। वहां पता चला कि कॉल के लिए फर्जी आईडी पर लिए गए सिम का इस्तेमाल किया गया।
यह आईडी बांदा निवासी अधिवक्ता अनुराग की थी। पुलिस टीम ने उनसे पूछताछ की तो पता चला कि कुछ दिनों पहले उनका नंबर बंद हो गया था। जिसके बाद केवाईसी अपडेट करने के लिए उन्होंने अपनी आईडी जमा की थी। पुलिस ने तफ्तीश आगे बढ़ाई तो पता चला कि अनुराग की आईडी पर हमीरपुर जिले से सिम खरीदा गया। शनिवार को हमीरपुर पहुंचकर टीम ने उस दुकान पर छापा मारा जहां से सिम खरीदा गया था। तब पता चला कि हमीरपुर निवासी पुनीत नामक युवक ने यह सिम लिया।
पुलिस ने उसके घर पर छापा मारा तो वह वहां से गायब मिला। घरवाले भी उसके बारे में कुछ बता नहीं सके। पुलिस टीम को गांववालों से जानकारी मिली कि पुनीत बालू, मिट्टी आदि का काम करता है। सूत्रों की मानें तो फिलहाल यह नहीं पता चल सका है कि उसने मंत्री को धमकी क्यों दी। उधर इस मामले में अफसर आधिकारिक रूप से कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। उनका सिर्फ यही कहना है कि जांच की जा रही है।
कॉल नहीं आई थी, सिर्फ भेजा मैसेज!
सूत्रों की मानें तो जांच में एक और बात सामने आई है कि मंत्री के मोबाइल पर सिर्फ मैसेज आया। जबकि उनकी ओर से थाने में भेजवाई गई तहरीर मेें आरोप लगाया गया था कि उनके निजी नंबर पर पहले कॉल आई और फिर धमकी भरा मैसेज आया। हालांकि मोबाइल कंपनी की ओर से जो विवरण उपलब्ध कराया गया है, उसके मुताबिक उपरोक्त नंबर से मंत्री के मोबाइल पर केवल मैसेज भेजा गया।