उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की ओर से एटा के अधिवक्ता राजेंद्र शर्मा और उनके रिश्तेदारों पर पुलिस बर्बरता और दुर्व्यवहार के मामले में गठित की गई जांच कमेटी ने शनिवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। काउंसिल की कार्यकारिणी के समक्ष रखी गई रिपोर्ट में पुलिस के कृत्य को अमर्यादित और गैर कानूनी बताया गया है। कहा गया कि मामले में डीएम और एसएसपी की भूमिका नियमों से परे है। निर्णय लिया गया कि मामले की रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष रखने के साथ सीजेएम एटा को भी तुरंत सौंपी जाए तथा घटना की सीबीआई या सीबीसीआईडी जांच कराई जाए।
बार काउंसिल ने एटा मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। कमेटी ने शनिवार को हुई बैठक में कार्यकारिणी के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए डीएम और एसएसपी की भूमिका को कठघरे में खड़ा किया। कहा कि 21 दिसंबर की घटना के वायरल हुए वीडियो में अधिवक्ता के खिलाफ पुलिस बर्बरता साफ दिखाई दे रही है। बार काउंसिल के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रापर्टी के मामले में उससे कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन जिस तरह से पुलिस ने बर्बरता दिखाई, वह सरासर गलत और नियम-कानून से परे है।
इतना ही नहीं मामले में हाईकोर्ट के न्यायिक जांच के आदेश के बावजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की लगातार दखलंदाजी की जा रही है। बार काउंसिल के चेयरमैन जानकी शरण पांडेय ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अफसरों द्वारा न्यायिक अफसरों पर जमानत न देने का दबाव बनाया जा रहा है। एडीजे की कोर्ट में जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान एटा डीएम और एसएसपी भी खड़े हो रहे हैं। चेयरमैन ने कहा कि जमानत अर्जी पर 29 दिसंबर और दो जनवरी को सुनवाई हुई है। दोनों ही दिन कोर्ट में डीएम और एसएसपी मौजूद थे।
प्रशासनिक अफसरों की यह मौजूदगी न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने की मंशा प्रतीत हो रही है। प्रशासनिक अफसरों की इस तरह कोर्ट में उपस्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मामले में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से इसकी शिकायत की जाएगी। चेयरमैन ने एटा के डीएम और एसएसपी के स्थानांतरण की मामले की जांच सीबीआई या सीबीसीआईडी से जांच कराने की मांग की।