कैंट के बेली में तीन दिन पहले दूध व्यवसायी सुधीर उर्फ ननका यादव (50) की मौत के मामले में मुकदमा न दर्ज किए जाने पर रविवार को परिजन व सपा नेताओं ने थाने का घेराव कर दिया। इस दौरान धरने पर बैठ गए और थाना प्रभारी से उनकी तीखी नोकझोंक हुई। इसके चलते घंटों तनावपूर्ण स्थिति रही। बाद में हत्या का मुकदमा दर्ज किए जाने पर मामला शांत हुआ। मामले में पांच लाेगों को नामजद किया गया है।
बेली गांव निवासी दूध व्यवसायी 24 जुलाई की रात 8:30 बजे के करीब स्टैनली रोड स्थित मुल्ला कैंपस में गंभीर रूप से घायल पड़े मिले थे। बेली अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी। भतीजे विकास यादव का आरोप है कि दो दिन पहले हुए विवाद को लेकर चाचा को बेरहमी से पीटा गया था। उसी दिन तहरीर दी गई लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
इसे लेकर रविवार दोपहर परिजनों ने सपा नेता संदीप यादव कार्यकर्ताओं संग थाने का घेराव कर धरने पर बैठ गए। आरोप लगाया कि बेली चौकी से 100 मीटर दूर घटना हुई। इसके बावजूद पुलिस जांच के नाम पर हत्या जैसे गंभीर मामले में लीपापोती में जुटी है। थाना प्रभारी सुनील कुमार कनौजिया ने हटाना चाहा तो प्रदर्शनकारियों से तीखी नोकझोंक भी हुई।
दोपहर 1:40 बजे पांच आरोपियाें के खिलाफ हत्या व मारपीट के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया। कैंट इंस्पेक्टर ने बताया कि सुरेंद्र कुमार गौतम, सचिन, सौरभ, सुशील और कुनाल गौतम को नामजद किया गया है।
मुकदमा दर्ज करने में देरी क्यों
मामले में बड़ा सवाल यह है कि अधेड़ की मौत के बाद भी आखिर मुकदमा दर्ज करने में देरी क्यों की गई। जानकारों का कहना है कि अगर हत्या के आरोप प्रथमदृष्टया सही नहीं लग रहे थे तो अन्य संबंधित धाराओं में भी एफआईआर दर्ज की जा सकती थी। इसके बावजूद ऐसा न करके कार्रवाई तीन दिनों तक टाली जाती रही।
परिजनों ने हत्या की तहरीर दी थी जबकि, भतीजा खुद दूध व्यवसायी को अस्पताल ले गया और डॉक्टरों को पेट दर्द की बात बताई थी। मारपीट का वीडियो फुटेज मिला है। पोस्टमार्टम में अधिक रक्तस्राव से मौत की बात सामने आई है। मृतक के शरीर पर कोई जाहिरा चोट के निशान नहीं पाए गए थे। जांच पड़ताल कराई जा रही है।- श्यामजीत प्रमिला सिंह, एसीपी, सिविल लाइंस