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बस अड्डे के सामने सिपाहियों-गाड़ी मालिक के बीच जमकर मारपीट, अफरा-तफरी

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Police men and bus driver colided at Civil line bus stop in Prayagraj
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अवैध तरीके से सवारियां भरने को लेकर हुआ विवाद
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सिविल लाइंस में बस अड्डे के सामने हुई घटना, अफरा-तफरी
प्रयागराज। सिविल लाइंस रोडवेज बस अड्डे के बाहर अवैध रूप से सवारियां भरने को लेकर शनिवार को तीन सिपाहियों व प्राइवेट गाड़ी मालिक के बीच जमकर मारपीट हुई। सरेआम हुई इस घटना से अफरातफरी मच गई। घटना में गाड़ी मालिक व एक सिपाही चोटिल हुआ। सूचना पर पहुंची पुलिस दोनों पक्षों को थाने लाकर पूछताछ में जुटी रही।
घटना शनिवार शाम करीब पांच बजे की है। करेली निवासी मो. शरीफ प्राइवेट गाड़ी चलवाता है। वह शनिवार शाम लखनऊ जाने के लिए गाड़ी लेकर रोडवेज बस अड्डे के सामने खड़ा था। इसी दौरान वहां पहुंचे तीन लोगों से उसकी किसी बात को लेकर नोकझोंक हो गई। देखते ही देखते बात बढ़ी और फिर उनके बीच मारपीट शुरू हो गई। इसके बाद करीब 10 मिनट तक सरेआम सड़क पर लात-घूंसे चलते रहे। जिससे राहगीरों में भगदड़ मच गई। घटना में जहां शरीफ के सिर में चोट आने के साथ ही उसके कपड़े फट गए वहीं दूसरे पक्ष से विजय कुमार सिंह नाम के व्यक्ति के पेट में चोट आई। उधर सूचना मिली तो सिविल लाइंस पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को थाने लाई। यहां पता चला कि दूसरे पक्ष से चोटिल हुआ विजय अग्निशमन विभाग का कर्मचारी है और मौजूदा समय में सिविल लाइंस फायर स्टेशन में तैनात है। उसका कहना है कि वह एक रिश्तेदार को लखनऊ की गाड़ी में बिठाने आया था। इसी दौरान गाड़ी मालिक ने गालीगलौच व मारपीट शुरू कर दी। उधर गाड़ी मालिक शरीफ का कहना है कि दूसरे पक्ष से पहुंचे तीनों लोग अग्निशमन विभाग के सिपाही हैं। इनमें से एक मौजूदा समय में गर्वनमेंट प्रेस में तैनात इकाई में तैनात है जो बस अड्डे के बाहर से प्राइवेट गाड़ी चलवाता है। सवारियां भरने को लेकर हुई कहासुनी के बाद ही उसने अपने दो साथी सिपाहियों को बुलाकर उस पर हमला बोल दिया। मामले मेें सिविल लाइंस इंस्पेक्टर से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
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पुलिस की शह पर चल रहा डग्गामारी का खेल
सूत्रों का कहना है कि रोडवेज बस अड्डे के सामने से डग्गामारी का यह अवैध खेल पुलिस व आरटीओ की शह पर चल रहा है। रोजाना बस अड्डे के बाहर से सैकड़ों प्राइवेट वाहनों में सवारियां बैठाई जाती हैं। रोडवेज कर्मचारियों के विरोध पर दबंगई के बल पर उन्हें शांत करा दिया जाता है। जिसकी कई बार शिकायत भी हो चुकी है। सूत्रों का कहना है कि उक्त अवैध रूप से सवारियां बैठाने के एवज में वाहनों के मालिकों से पुलिस वसूली करती है और उसके ही इशारे पर इन वाहनों का नंबर लगता है। उधर मामले में एआरटीओ प्रवर्तन राजकुमार सिंह का कहना है कि डग्गामार वाहनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। सिविल लाइंस बस अड्डे के बाहर अभियान और तेज किया जाएगा।
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