कोर्ट ने सुनवाई करते हुए पाया कि जांच अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन मनमानी तरीके से कर रहे हैं। हत्या की धाराओं में दर्ज मुकदमे को बिना किसी ठोस सबूत के हत्या के लिए उकसाने की धारा में बदल दे रहे हैं। कोर्ट ने पाया कि जांच अधिकारी बिना किसी आधार पर अपराध को विभिन्न धाराओं में परिवर्तित कर रहे हैं, वे रिपोर्ट में कारण का भी जिक्र नहीं कर रहे हैं।
कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए पुलिस महानिदेशक को जांच की कमियों को दूर करने के लिए निर्देश जारी किया है। साथ ही पुलिस आयुक्त आगरा को निर्देश दिया कि संबंधित जांच अधिकारी को हत्या के मामलों की जांच में कुशल बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिलाया जाए। जब तक प्रशिक्षण न हो उसे कोई जांच न सौंपी जाए। वहीं, कोर्ट ने दोनों जमानत अर्जियों को सशर्त स्वीकार कर लिया है।