वहां थानाध्यक्ष विश्वजीत सिंह व एसआई मनमोहन मिश्रा ने उसके पति को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया। उसके पति को ही थाने में बैठा लिया गया। उसके पति को इस हिदायत पर छोड़ा गया कि दोबारा शिकायत करने नहीं आना। आओगे तो फर्जी मुकदमे में जेल भेज दिया जाएगा। रंजना का कहना है कि थानाध्यक्ष ने उसके पति से कहा कि जान दे देना , लेकिन लेकिन दोबारा थाने मत आना।
रंजना का आरोप है कि इस अपमान से क्षुब्ध होकर उसके पति ने 19 जून की सुबह ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। जिसमें पति की जान तो बच गई, लेकिन गंभीर चोट आने की वजह से वह कोमा में चले गए। जिनका इलाज एसआरएन अस्पताल में चल रहा है। युवक की पत्नी रंजना ने करछना थाने की पुलिस पर सूदखोरों को बचाने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि पति अस्पताल में मौत से जूझ रहे हैं और उस पर समझौते को लेकर दबाव बनाया जा रहा है।