यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश कु0 अनीता ने सुनाया। मामला प्रयागराज के थाना शाहगंज का है। वर्ष 2011 में पुलिस ने स्टेशन के पास स्थित एक होटल से लवकुश भारतीया, उपेंद्र साहू और राजू को ब्रांडेड अग्रेजी शराब की बोतलों में मिलावटी शराब भरते हुए पकड़ा था।
जिला न्यायालय इलाहाबाद ने 11 साल पहले बनाई जा रही मिलावटी शराब की बरामदगी दिखा कर गिरफ्तार किये गए दो मुल्जिमों को आरोप मुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि मामले में पेश गवाहों के बयान में विरोधाभाष होनें के साथ ही पुलिस द्वारा अदालत के समक्ष बरामद शराब पेश न कर पाना संदेह पैदा करता है।
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यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश कु0 अनीता ने सुनाया। मामला प्रयागराज के थाना शाहगंज का है। वर्ष 2011 में पुलिस ने स्टेशन के पास स्थित एक होटल से लवकुश भारतीया, उपेंद्र साहू और राजू को ब्रांडेड अग्रेजी शराब की बोतलों में मिलावटी शराब भरते हुए पकड़ा था। मौके से गिरफ्तारी के साथ ही आरोपियों के कब्जे से 72 शीशी शराब की बरामदगी का दावा किया था।
गिरफ्तार आरोपियों ने बताया था कि स्वतंत्रता दिवस पर शराब की दुकानें बंद रहने के दौरान बेचने के लिए मिलावटी शराब बना रहे थे। विवेचना के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल हुआ और विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से पांच लोगों कर गवारी करवाई गई। 11 साल चले विचारण के दौरान कई मौके देने के बाद भी पुलिस बरामद की गई 72 शीशी मिलावटी शराब अदालत के समक्ष पेश नहीं कर सकी। अदालत ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि पुलिस की ओर से शराब को नष्ट करने के संबंध में भी कोई अर्जी अदालत में नहीं दी गई है।
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अदालत ने पुलिस की ओर से पेश गवाहों की विरोधाभाष और बरामद शराब को पेश न कर पाने की असफलता को संदेहस्पद माना। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित विधि व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए आरोपियों को संदेह का लाभ पाने का अधिकारी माना। अदालत ने आरोपी लवकुश भारतीय और उपेंद्र साहू को आरोपों से बरी कर दिया।