नौ अगस्त को पश्चिमशरीरा कोतवाली के बरूवा गांव में ब्याही ज्ञानचंद्र की बेटी ने शव की शिनाख्त अपने पिता के रूप में की। ज्ञानचंद्र के खिलाफ वर्ष 2011 में करारी कोतवाली में पुलिस मुठभेड़ का मामला दर्ज हुआ था। इसी साल सैनी कोतवाली में उसके खिलाफ चोरी के दो मामले दर्ज हुए। करारी पुलिस ने तमंचा के साथ गिरफ्तार कर उसे जेल भेजा। इसके बाद करारी पुलिस ने उसके खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की।
वर्ष 2016 में सरायअकिल कोतवाली में ज्ञान के खिलाफ लूट का मामला दर्ज हुआ। वर्ष 2019 में ज्ञान के खिलाफ पश्चिमशरीरा कोतवाली में चोरी के दो मामले दर्ज किए गए। वर्ष 2021 में ज्ञानचंद्र की करारी पुलिस ने हिस्ट्रीशीट खोल कर बराबर निगरानी का दावा किया लेकिन उसने पुलिस को चकमा देकर साथियों के साथ सोरांव में दोहरे हत्याकांड को अंजाम दे डाला।
जिले में 728 हिस्ट्रीशीटर, निगरानी के नाम पर हो रही खानापूरी
जिले में कुल 728 हिस्ट्रीशीटर हैं। इनकी निगरानी बीट सिपाही से लेकर हलका दरोगा तक करते हैं। हिस्ट्रीशीटरों की हर गतिविधि पर नजर रखने का दावा होता है। इनकी रात में भी निगरानी होती है। लेकिन इन दावों के बीच करारी पुलिस द्वारा ज्ञानचंद्र की पहचान न कर पाना, पुलिस की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
करारी कोतवाली में 80 हिस्ट्रीशीटर हैं, इनमें से 29 वैशकांटी के ही रहने वाले हैं। इन्हीं में ज्ञानचंद्र भी शामिल था। वह सक्रिय अपराधी भी था। इसी तरह परिश्चमशरीरा में 48, मंझनपुर में 75, कौशाम्बी में सात, पिपरी में 72, कोखराज में 89, सैनी में 86, महेवाघाट में 36, सरायअकिल में 29, चरवा में 106, कड़ाधाम में 45 व पइंसा कोतवाली में 35 लोगों की हिट्रीशीट खोली गई है। ज्ञानचंद्र की तरह ही अगर बाकी हिस्ट्रीशीटरों की भी निगरानी हो रही होगी तो फिर कानून व्यवस्था का ऊपर वाला ही मालिक है।
काफी दिनों से चकमा दे रहा था ज्ञान
एसपी हेमराज मीना के मुताबिक हिस्ट्रीशीटर ज्ञानचंद्र की बराबर निगरानी की जाती थी लेकिन वह काफी दिनों से चकमा दे रहा था। कई बार पुलिस उसके घर गई लेकिन परिवार के लोग कभी रिश्तेदारी तो कभी कहीं और जाने की सूचना देते थे।
हिस्ट्रीशीटरों की बराबर निगरानी कराई जाती है। दोहरे हत्याकांड के आरोपी ज्ञानचंद्र का शव बॉर्डर गांव में मिला। फांसी लगाने पर चेहरा बिगड़ जाता है। इस वजह से पुलिस को पहचान कराने में दिक्कत हुई। - हेमराज मीना, एसपी