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Kumar Vishwas In Prayagraj : तुम गईं छोड़कर जिस जगह मोड़ पर, मैं वहीं पर खड़ा हूं तुम्हारे बिना...

Fri, 21 Mar 2025 02:24 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कुमार विश्वास ने रात 10 बजे माइक संभाला तो इस शहर की गलियों में बिताई तीन दशक पुरानी यादों को ताजा कर भावुक हो उठे। मौका था केपी ग्राउंड में ठाकुर हर नारायण सिंह ग्रुप ऑफ कॉलेज और प्रयाग उत्थान समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रयाग होली महोत्सव का।
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प्रयागराज में कवि सम्मेलन में कविता पाठ करते कवि कुमार विश्वास। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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जिंदगी से लड़ा हूं तुम्हारे बिना/ हाशिये पर पड़ा हूं तुम्हारे बिना/तुम गई छोड़कर जिस जगह मोड़ पर/ मैं वहीं पर खड़ा हूं तुम्हारे बिना....। ये गंगा का किनारा है... जैसी पंक्तियों से कवि डॉ. कुमार विश्वास ने बृहस्पतिवार की रात प्रयागराज की गलियों से लेकर संगम की रेती तक से अपने गहरे लगावों को रेखांकित किया और भावुक हो उठे। वह बार-बार कविताओं के जरिये बताते रहे कि उनको रचने, गढ़ने में इस मिट्टी की खुशबू का कितना योगदान रहा है।

तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कुमार विश्वास ने रात 10 बजे माइक संभाला तो इस शहर की गलियों में बिताई तीन दशक पुरानी यादों को ताजा कर भावुक हो उठे। मौका था केपी ग्राउंड में ठाकुर हर नारायण सिंह ग्रुप ऑफ कॉलेज और प्रयाग उत्थान समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रयाग होली महोत्सव का।

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शाम सात बजे तक खचाखच दीर्घा भर गई। हर किसी को इंतजार था कुमार विश्वास के आने का। लंबे इंतजार के बाद वह घड़ी आई तो कुमार ने संगमनगरी की महिमा और प्रेम की अनगिनत स्मृतियों को अपने अंतस से उड़ेलना शुरू कर दिया। कैसे बस से लेकर इसी धरती की तीकत की दौलत उन्होंने चार्टर्ड प्लेन तक के सफर का संघर्ष किया, इसे वह कविताओं में चित्रित करते रहे।

प्रयागराज में कवि सम्मेलन में कविता पाठ करते कवि कुमार विश्वास। - फोटो : अमर उजाला।

पुराने दिनों की यादें ताजा कर आंखें भर लीं। उन्होंने शुरुआत अपने पुराने गंगा गीत से की। खिलौने साथ बचपन तक, रवानी बस जवानी तक/ सभी अनुभव भरे किस्से बुढ़ापे की कहानी तक/जमाने में सहारे है सभी बस जिंदगी भर के/मगर ये जिंदगी के आखिरी पल का सहारा है/ये गंगा का किनारा है...।

इससे पहले कुमार ने सबसे पहले दावते सुखन दिया दिनेश बावरा को। उन्होंने मोबाइल की लत से नई पीढ़ी को अपनी कविता के जरिये सावधान किया तो हास्य कवि सुदीप भोला ने बेटियों को संस्कार और मर्यादा में रहने की संस्कृति समझाई। कवि रमेश मुस्कान और पद्मिनी शर्मा की कविताएं सराही गईं। इससे पहले कवि सम्मेलन का शुभारंभ न्यायमूर्ति गौतम चौधरी, महापौर गणेश केसरवानी, पूर्व सांसद रीता बहुगुणा जोशी, केपी ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. सुशील सिन्हा और पूर्व महा अधिवक्ता नीरज त्रिपाठी, प्रबंधक डॉ. उदय प्रताप सिंह ने दीप जलाकर किया।

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कवि सम्मेलन में मौजूद अतिथि। - फोटो : अमर उजाला।

भारत समावेशी संस्कृति की धरती

डॉ. कुमार विश्वास ने प्रयागराजवासियों को होली की बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत समावेशी संस्कृति का देश है। यहां समरसता होली के रंग में बरसती है। प्रयागराज साहित्य पराक्रम की धरती है। इस देश की माटी में औरंगजेब की महिमा का मंडन नहीं हो सकता।

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