प्रयागराज में कवि सम्मेलन में कविता पाठ करते कवि कुमार विश्वास।
- फोटो : अमर उजाला।
पुराने दिनों की यादें ताजा कर आंखें भर लीं। उन्होंने शुरुआत अपने पुराने गंगा गीत से की। खिलौने साथ बचपन तक, रवानी बस जवानी तक/ सभी अनुभव भरे किस्से बुढ़ापे की कहानी तक/जमाने में सहारे है सभी बस जिंदगी भर के/मगर ये जिंदगी के आखिरी पल का सहारा है/ये गंगा का किनारा है...।
इससे पहले कुमार ने सबसे पहले दावते सुखन दिया दिनेश बावरा को। उन्होंने मोबाइल की लत से नई पीढ़ी को अपनी कविता के जरिये सावधान किया तो हास्य कवि सुदीप भोला ने बेटियों को संस्कार और मर्यादा में रहने की संस्कृति समझाई। कवि रमेश मुस्कान और पद्मिनी शर्मा की कविताएं सराही गईं। इससे पहले कवि सम्मेलन का शुभारंभ न्यायमूर्ति गौतम चौधरी, महापौर गणेश केसरवानी, पूर्व सांसद रीता बहुगुणा जोशी, केपी ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. सुशील सिन्हा और पूर्व महा अधिवक्ता नीरज त्रिपाठी, प्रबंधक डॉ. उदय प्रताप सिंह ने दीप जलाकर किया।
कवि सम्मेलन में मौजूद अतिथि।
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भारत समावेशी संस्कृति की धरती
डॉ. कुमार विश्वास ने प्रयागराजवासियों को होली की बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत समावेशी संस्कृति का देश है। यहां समरसता होली के रंग में बरसती है। प्रयागराज साहित्य पराक्रम की धरती है। इस देश की माटी में औरंगजेब की महिमा का मंडन नहीं हो सकता।