कुंभ से पहले प्रयागराज पहुंचे पीएम ने देश के करोड़ों सनातनधर्मियों की श्रद्धा भावना से जुड़े अक्षयवट तीर्थ को आम जनता के दर्शन के लिए खोलने का एलान किया। अक्षयवट सुरक्षा कारणों से लंबे समय से अकबर के किले में बंद था और साधु-संतों के अलावा श्रद्धालु इसके दर्शन-पूजन से वंचित थे। पीएम ने कहा कि अब त्रिवेणी में स्नान के साथ ही देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालु अक्षय वट के दर्शन कर सकेंगे। साथ ही सरस्वती कूप को भी उन्होंने खोलने की घोषणा की।
झूंसी (अंदावा) स्थित संत निरंकारी सत्संग परिसर में प्रधानमंत्री ने पीएम ने अक्षयवट की जड़ों को रेखांकित किया। कहा कि प्रयागराज की धरती पर अक्षय वट अपनी गहरी जड़ों के कारण बार-बार नष्ट होने के बाद भी पुष्पित-पल्लवित होता रहा है, लेकिन यह अक्षयवट कई पीढ़ियों से किले में बंद था। अब कुंभ में आने वाले देश-दुनिया के श्रद्धालु त्रिवेणी में स्नान के बाद अक्षयवट और सरस्वती कूप के दर्शन का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। आज मैं खुद इसके दर्शन कर आया हूं। अक्षयवट खोलने के पीएम के एलान का भीड़ ने खुशियों के शोर के साथ हाथ हिलाकर, झंडे लहराकर स्वागत किया।
इनसेट
पीएम अक्षयवट के नीचे लगाया ध्यान,सेना के अफसरों ने पत्तों से बना प्रतीक चिह्न किया भेंट
प्रयागराज। संगमतट पर गंगा पूजन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किले में स्थित अक्षयवट पहुंचे। वहां उन्होंने अक्षयवट का दर्शन-पूजन किया। पीएम कुछ देर अक्षयवट की जड़ों को निहारते रहे। फिर उन्होंने पवित्र अक्षय वट के नीचे बैठ कर कुछ देर ध्यान लगाया। इसके बाद पीएम ने किले में स्थापित अन्य देवी-देवताओं का भी दर्शन-पूजन किया और वहां पर मौजूद सेना के अधिकारियों से कुंभ की तैयारियों के संदर्भ में जानकारी ली। वहां पर मौजूद सेना के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री को अक्षयवट वृक्ष के पत्तों का बना प्रतीक चिह्न भी भेंट किया।