फलों व फूल के रंग व हर्बल गुलाल से खेलें होली
होली का पर्व खुशियों व हर्षोल्लास का पर्व होता है। इसमें हर्बल रंगाें का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इन दिनों बाजारों में तमाम प्रकार के फूल व फलों के रंग मौजूद हैं। यह रंग देखने में कम चमकदार होते हैं। इसलिए इन्हें जानकार लोग ही खरीदते हैं। अन्यथा लोग मिलावटी चटक रंग खरीदने को प्राथमिकता देते हैं। अरारोट व मैदा से बनने वाले गुलाब की सुगंध वाले गुलाल की कीमत केमिकल गुलाल की अपेक्षा ज्यादा होती है। इन्हें पहचानने में लोगों से अक्सर गलती हो जाती है।
रंग-बिरंगी चीजों को खाने से बचें
होली पर लोग जमकर मैदे का सेवन करते हैं। इसके अलावा रंग-बिरंगे चिप्स, पापड़ व कचरी भी मार्केट में उपलब्ध है। ऐसे में अगर थोड़ी सी सावधानी हटी तो पाचन क्रिया प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है। हर साल होली के बाद पेट खराब होने के लगभग 60 फीसदी मामले अस्पतालों में देखने को मिलते हैं।
केमिकल रंगों से आंखों में घाव हो जाता है। इसके कारण आंख का लाल होना व खुजली होना स्वभाविक है। ऐसे में रंग खेलने से पहले अपनी आंखों की सुरक्षा का ख्याल रखें और चश्मे का इस्तेमाल करें। इसके अलावा एक एंटी बॉयोटिक आई ड्र्रॉप अपने पास जरूर रखें। - डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य, मोती लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज।
होली खेलने से पहले नारियल के तेल का इस्तेमाल करें। साबुन से रंग को साफ करने के बजाए हल्दी व बेसन के उबटन का उपयोग करें। कोशिश करें की केमिकल रंगों की जगह हर्बल रंगों की सुरक्षित होती खेलें। - डॉ. एसके ओझा, त्वचा रोग विशेषज्ञ, कॉल्विन अस्पताल।
होली के समय तमाम प्रकार की चीजें खाई जाती हैं। इस दौरान पेट और दांत दोनों पर इसका असर पड़ता है। इसलिए दांतों की सफाई का विशेष ख्याल रखें। हो सके तो रात को सोते समय भी दांतों को साफ करके सोएं। -डॉ. स्वाती चौधरी, दंत रोग विशेषज्ञ।