हर साल समुद्र में 140 लाख टन कचरा
एक रिपोर्ट के अनुसार हर साल 140 लाख टन प्लास्टिक समुद्र में फेंका जा रहा है। नदियों के माध्यम से भी यह समुद्र में जा रहा है। जहां पर्यावरण प्रदूषण नहीं है, वहां भी प्लास्टिक कण मिले हैं। अंडमान-निकोबार इसका जीता-जागता उदाहरण है।
किचन का हर सामान प्लास्टिक में पैक
डॉ. सोनकर बताते हैं कि यूं तो किचन में रखा ज्यादातर सामान प्लास्टिक पैक में ही है, लेकिन जब सिरका, आंवले का जूस जैसे अम्लीय पदार्थ पैकिंग की प्लास्टिक के संपर्क में आता है तो यह तेजी से टूटने लगता है। सूक्ष्म प्लास्टिक कण खाने के साथ हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं। यह किडनी-लिवर के लिए खतरनाक है। इससे कैंसर भी हो सकता है।
भारतीय समुद्र में पहली बार मिली प्लास्टिक की चट्टान
अध्ययन के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में प्लास्टिक निर्मित चट्टान (प्लास्टिग्लोमरेट) मिली है। भारतीय समुद्र क्षेत्र में यह पहली बार है। अभी तक प्लास्टिग्लोमरेट्स हवाई द्वीप के कामिलो बीच, इंडोनेशिया, अमेरिका, पुर्तगाल, कनाडा और पेरू में ही मिले हैं। इसका गठन प्लास्टिक के संपर्क में आए रेत, चट्टान के टुकड़े, सीप और अन्य सामग्रियों से होता है।
सौ फीसदी रीसाइकिल नहीं तो बंद हो प्रयोग
डॉ. सोनकर बताते हैं कि प्लास्टिक पूरी पृथ्वी के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। इसे भी रेडियोधर्मी तत्वों की तरह खुले वातावरण में पहुंचने से रोकना होगा। अगर इसे सौ फीसदी रीसाइकिल नहीं कर सकते तो उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना ही विकल्प है। इस त्रासदी को तभी रोका जा सकता है।