हाईकोर्ट के मंच पर अपने कार्यकाल में दूसरी बार आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिलान्यास समारोह के मौके पर कहा कि सरकार ने लोकहित की तमाम योजनाएं प्रारंभ की हैं, मगर कई बार इनको लेकर दाखिल होनी वाली जनहित याचिकाओं में यह योजनाएं त्रिशूल की तरह लटक जाती हैं। कई लोग सिर्फ मीडिया में बने रहने और लोकप्रियता के लिए जनहित याचिकाएं दाखिल करते हैं, जिससे जनता के हित की योजनाएं लटक जाती हैं।
मुख्यमंत्री ने महंगे और खर्चीले होते न्याय पर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के स्तर से जनता को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय दिलाने के लिए जो भी प्रयास हो रहे हैं, उसे पूरा करने मेें सरकार पूरा सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि न्याय सबल और त्वरित होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने बताया कि न्यायपालिका के सहयोग से हम संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन खड़ा कर सकते हैं जो न्यायिक कार्य में मददगार होगा। योगी ने बताया कि जनता की शिकायतों का निस्तारण करने के लिए उनकी सरकार ने आईजीआरएस पोर्टल विकसित किया है। इसमें हमें आठ महीने में 22,83,43 लाख शिकायतें प्राप्त हुईं, जिसमें से 20,32,39 शिकायतों का निस्तारण सफलता पूर्वक कर दिया गया। न्यायग्राम में प्रस्तावित ज्यूडिशियल एकेडमी और ऑडिटोरियम आदि सुविधाओं की चर्चा करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि एकेडमी सुलभ न्याय दिलाने के लक्ष्य को हासिल करने में मददगार होगी। अगली बार जब हम न्यायग्राम के उद्घाटन समारोह में आएंगे तो मैदान में बने पंडाल में नहीं ऑडिटोरियम हॉल में समारोह का आयोजन होगा।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत करते ही कहा कि प्रयाग का भगवान राम से गहरा नाता है। 14 वर्षों के वनवास में जाते समय वह यहां आए थे और वनवास समाप्त कर लौटे तब भी यहां आए। आज इस पर भी दो-दो राम, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और राज्यपाल रामनाईक मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि आज शनिवार का दिन है और शनि न्याय के देवता हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयाग की पहचान पवित्र संगम है। गंगा-यमुना को तो हम देख सकते हैं मगर सरस्वती यहां छात्रों के रूप में देखने को मिलती हैं। यहां आने वाला जीवन में कुछ न कुछ बनकर यहां से जाता है।