इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कक्षा एक से आठ तक की लड़कियों की शिक्षा में जूडो कराटे और ताइक्वांडो को शामिल करने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने कहा है कि इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भेजने और 15 दिन के भीतर न्यायालय का दरवाजा खटखटाना उचित नहीं है। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति विकास की खंडपीठ ने यह आदेश दिया।
प्रयागराज निवासी शालिनी अग्रवाल की ओर से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। उनकी दलील थी कि लड़कियां आत्मविश्वास के साथ स्वतंत्रता पूर्वक आगे बढ़ें, इसके लिए उन्हें आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। इसके तहत सभी लड़कियों के लिए कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई में ताइक्वांडो और जूडो कराटे को नियमित पाठ्यक्रम के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। इससे लड़कियां सभी कठिनाइयों का मजबूती से सामना कर सकेंगी। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजा था।
इसके कुछ दिन बाद ही उन्होंने हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दाखिल की थी। खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि विषय वस्तु पर ठीक से शोध नहीं किया गया है। दो मई 2024 को मुख्यमंत्री को पत्र भेजा गया। फिर 17 मई 2024 को याचिका दायर कर दी गई। कोर्ट ने कहा कि याचिका में लड़कियों को स्वतंत्रता, आत्मविश्वास आदि की आवश्यकता के लिए सामान्य दावे किए गए हैं, लेकिन छात्राओं को प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।