बदहाल हिंदू हॉस्टल की तस्वीर जल्द ही बदलने वाली है। हॉस्टल का संचालन करने वाला ट्रस्ट इसे इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) को देने के लिए तैयार हो गया है। हालांकि हॉस्टल को ट्रांसफर करने में इतना अधिक खर्च होने जा रहा है कि इविवि प्रशासन इसे 29 साल 11 माह की लीज पर लेने जा रहा है। हॉस्टल स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी होते ही इविवि को हॉस्टल की मरम्मत एवं अन्य कार्यों के लिए यूजीसी से बजट मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।
हिंदू हॉस्टल की स्थापना वर्ष 1901 में हुई थी। इसका संचालन मदन मोहन मालवीय ट्रस्ट की ओर से किया जा रहा है। हॉस्टल वॉश आउट के बाद बाद ऐतिहासिक हिंदू हॉस्टल में मरम्मत का कोई काम नहीं हुआ, क्योंकि ट्रस्ट के पास इसके लिए पर्याप्त धन नहीं है। इस हॉस्टल का निर्माण चंदे से कराया गया था और आज भी हॉस्टल के कमरों में उन लोगों के नाम का बोर्ड लगा हुआ है, जिन्होंने इसके लिए निर्माण के लिए चंदा दिया था। हॉस्टल की हालत काफी बदतर हो चुकी है। हॉस्टल का कुछ हिस्सा खंडहर में तब्दील हो चुका है। पानी की पाइप लाइनें उखड़ी पड़ी हैं। शौचालय और स्नानागार के दरवाजे भी टूट गए हैं। इस हॉस्टल में सभी कमरे डबल सिटेड वाले 194 कमरे हैं। यानी एक कमरे में दो-दो छात्र रहते हैं और कुल 368 छात्रों के रहने की क्षमता है।
वॉश आउट के बाद इस हॉस्टल में स्नातक एवं परास्नातक में नवप्रवेशितों को कमरे आवंटित किए जा रहे हैं। हॉस्टल की जो हालत हैं, उन परिस्थितियों में छात्रों के लिए वहां रह पाना चुनौतीपूर्ण होगा लेकिन यह दिक्कत ज्यादा दिनों तक नहीं रहेगी। फिलहाल एमएलसी यज्ञदत्त शर्मा की ओर से वहां ओवरहेड टैंक के निर्माण के लिए 15 लाख रुपये दिए गए हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे बताते हैं कि ट्रस्ट के सचिव जस्टिस गिरिधर मालवीय की ओर से हॉस्टल विश्वविद्यालय के नाम ट्रांसफर किए जाने का प्रस्ताव आया है, ताकि वहां सुधार के काम हो सकें। हॉस्टल की ट्रांसफर प्रक्रिया के तहत इसके बैनामे में काफी अधिक खर्च आएगा, सो तय हुआ है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय इसे लीज पर लेगा। हॉस्टल विश्वविद्यालय के पास आने के बाद इसकी मरम्मत एवं अन्य कार्य कराए जाने के लिए यूजीसी से बजट मिल सकेगा और वहां रहने वाले छात्रों की सुविधाओं में इजाफा होगा। जल्द ही हॉस्टल ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।