पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू, राम मनोहर लोहिया, कांशीराम और डॉ. सोनेलाल पटेल जैसे राजनीतिज्ञों की कर्मस्थली होने की वजह से फूलपुर सीट हमेशा सुर्खियां बटोरती रही है। मौजूदा समय में यहां की सांसद भाजपा की केशरी देवी पटेल हैं। 2019 में सपा गठबंधन के प्रत्याशी पंधारी यादव को उन्होंने बड़े अंतर से हराया था। राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो 2022 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन के साथ मिलकर 13 सीटें जीतने वाले अद (एस) ने इस बार भाजपा नेतृत्व से यूपी में तीन लोक सभा सीटें मांगी थीं।
हालांकि, उन्हें मिलीं दो ही हैं। इनमें से अभी राबर्ट्सगंज (सुरक्षित) और मिर्जापुर सीटें अद एस के पास हैं। मिर्जापुर से खुद अद एस की अध्यक्ष केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल सांसद हैं तो राबर्ट्सगंज से पकौड़ी लाल कोल पिछले चुनाव में जीते थे। अनुप्रिया समर्थकों की दिली ख्वाहिश है कि अपना दल के संस्थापक डॉ. सोने लाल पटेल फूलपुर से लगातार पांच बार चुनाव लड़े थे।
यह दीगर बात है कि वह एक बार भी नहीं जीत पाए, लेकिन यहीं के बूते पार्टी संगठन की ताकत बढ़ी। पार्टी बंट जाने के बावजूद अनुप्रिया पटेल ने खुद को यूपी की बड़ी राजनीतिक हैसियत बना लिया है। विधायकों की संख्या की दृष्टि से उनकी पार्टी प्रदेश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है। अपनी बढ़ती ताकत और विस्तार के बीच पिता की विरासत पर अनुप्रिया की नजर है। वह फूलपुर सीट भी गठबंधन के खाते में चाहती हैं।
चुनावी रणनीतिकारों का मानना है कि सीट शेयरिंग के फार्मूले के तहत अपना दल को दो सीटें ही मिली हैं, इसलिए मिर्जापुर और राबर्ट्सगंज में से कोई एक सीट छोड़नी पड़ सकती है। अनुप्रिया मिर्जापुर में बनी-बनाई जमीन छोड़कर खुद कोई नया ठिकाना खोजेंगे, इसके आसार नहीं लगते। लिहाजा, ऐसा कोई अवसर मिलने पर राबर्ट्सगंज छोड़ना ही विकल्प रह जाता है। इसके बदले ही वह फूलपुर सीट चाहती हैं।
इस इलाके की पांचों विधानसभा सीटों पर उनके कार्यकर्ताओं ने मशक्कत भी खूब की है।फूलपुर पर नजर सपा से विधायक पल्लवी पटेल की भी है। वह बीते विधानसभा चुनाव में कौशाम्बी की सिराथू सीट से डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को हरा चुकीं हैं। वह चाहती हैं कि फूलपुर से इंडिया गठबंधन के साथ खुद या उनकी मां कृष्णा पटेल को उतारा जाए। इसके लिए वह दावेदारी भी कर चुकी हैं।
बीते दिनों राज्यसभा चुनाव के दौरान उनकी नाराजगी के पीछे यही कयास लगाए जा रहे थे कि वह राज्यसभा का टिकट अपनी मां के लिए चाहती थीं, लेकिन सपा इसके लिए राजी नहीं हुई। अब उनकी नाराजगी को दूर करने के लिए सपा उन्हें पटेल बाहुल्य इस सीट पर मौका दे सकती है। वैसे, 2019 के लोकसभा चुनाव में पल्लवी के पति पंकज निरंजन कांग्रेस के टिकट पर फूलपुर से लड़ चुके हैं। तब उन्हें सिर्फ 32, 761 मत ही हासिल हुए थे।
पांच बार फूलपुर से लड़े थे सोनेलाल
डॉ. सोनेलाल पटेल फूलपुर से कुल पांच बार चुनाव लड़े थे। पहली बार वर्ष 1996 में उन्होंने फूलपुर से पर्चा भरा था। इसके बाद से 2009 तक लगातार वह पांच चुनाव लड़े, लेकिन जीत नहीं पाए। सोनेलाल पटेल को 1996 के चुनाव में 2426 वोट, 1998 में 42152, 1999 में 127780 वोट, 2004 के चुनाव में 80388 वोट और 2009 के चुनाव में 76699 वोट मिले थे।