एमबीए ही नहीं प्रबंधन में पीएचडी की उपाधि भी अब नौकरी की गारंटी नहीं रह गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि नौकरी की तलाश में भटकने वाले युवाओं में सबसे अधिक संख्या प्रबंधन में जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) और राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) क्वालीफाइड युवाओं की है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पोर्टल पर जारी आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक 4557 नेट और 835 जेआरएफ अभ्यर्थियों ने नौकरी की मांग की है। इतना ही नहीं पीएचडी करने वाले 691 युवा भी बेरोजगार हैं या उन्हें मनपसंद नौकरी नहीं मिली है। गौर करने वाली बात यह भी है कि इस सूची में प्रबंधन के बाद नंबर वाणिज्य का है।
एक दौर था जब एमबीए बेहतर कॅरियर की गारंटी हुआ करता था लेकिन हालिया रिपोर्ट के अनुसार एमबीए की पढ़ाई करने के बाद मात्र सात फीसदी युवाओं को नौकरी मिली। अब तो प्रबंधन संस्थानों के बंद होने का क्रम भी शुरू हो गया है। स्थिति अब और चिंताजनक हो गई है। यूजीसी के जॉब पोर्टल पर नौकरी के लिए कुल 8916 जेआरएफ अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इनमें सबसे अधिक 835 प्रबंधन के हैं। वाणिज्य के 660, शिक्षाशास्त्र के 550, हिन्दी के 434 और हिन्दी के 434 अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इसी तरह से कुल 32423 नेट अभ्यर्थियों ने नौकरी की मांग की है। इनमें 4557 प्रबंधन के हैं। इसके बाद वाणिज्य के 4557 अभ्यर्थी हैं। इनके बाद शिक्षाशास्त्र के 2186, कम्प्यूटर साइंस के 164 और हिन्दी के 1325 अभ्यर्थी हैं। इनके अलावा कुल 16908 पीएचडी अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इसमें सबसे अधिक संख्या जीव विज्ञान के अभ्यर्थियों की 2855 है। इसके बाद रसायन विज्ञान के 1594, भौतिकी के 976, वाणिज्य के 851 अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इनके बाद प्रबंधन के 691 अभ्यर्थियों ने नौकरी की मांग की है।