इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केवाईसी अपडेट के नाम पर बैंक फ्रॉड की सहभागी कंपनी इसरव्यू टेक्नोलॉजी प्रा. लि. कानपुर नगर के खिलाफ किदवई नगर थाने में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट का क्षेत्राधिकार एफआईआर को रद्द करने तक ही सीमित है, तथ्य पर निष्कर्ष निकालने का नहीं। तथ्य की विवेचना कर निष्कर्ष निकालने का काम विवेचना अधिकारी का है। आरोप गंभीर है। हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
यह आदेश न्यायमूर्ति बच्चूलाल तथा न्यायमूर्ति शमीम अहमद की खंडपीठ ने प्राथमिकी की वैधता की चुनौती याचिका को खारिज करते हुए दिया है। याचिका में कहा गया था कि इस धोखाध़ड़ी में कंपनी की कोई भूमिका नहीं है। उसका बैंक खाता जब्त न किया जाए और प्रबंधन व कर्मचारियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए। याची कंपनी का कहना था कि वह वित्तीय तकनीकी स्टार्ट अप कंपनी है। उसका काम डिजिटल वित्तीय लेनदेन प्रमोट करना है। ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराना है। बैंक धोखाधड़ी से उसका कोई संबंध नहीं है।
मामले के अनुसार 4 जनवरी 20 को शिकायतकर्ता के पास फोन आया और पेटीएम अपडेट के लिए केवाईसी मांगा तथा क्यूएसएफ को टीम वे -ईरैप पर अपलोड करने को कहा। इसके बाद पेटीएम में एक रुपया आया। फिर ओटीपी आया और 10 लाख 4 रुपये 90 पैसे निकाल लिया गया। फिर किस्तों में शिकायतकर्ता, उसकी पत्नी, बेटों के खाते से पैसे निकाल लिए गए। ये पैसे सद्दाम हुसैन के खाते में जमा हुए। उसने मेसर्स सिस्टेमेटिक सर्विसेज प्रा. लि. कंपनी को ट्रांसफर किया। फिर याची के खाते में भेज दिया। याची का कहना था कि उसने कोई अपराध किया ही नहीं। सरकारी वकील का कहना था कि इसमें याची कंपनी की मुख्य भूमिका है।