इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) की कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। याचिका में कुलपति के चयन में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। कोर्ट ने कहा कि लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण नहीं प्रस्तुत किए गए हैं, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया पर संदेह किया जा सके।
यह फैसला न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र और न्यायमूर्ति डोनाडी रमेश की अदालत ने एएमयू के प्रो. मुजाहिद बेग की ओर दाखिल याचिका पर सुनाया है। याची ने आरोप लगाया था कि कार्यवाहक कुलपति प्रो.मोहम्मद गुलरेज की पत्नी प्रो.नईमा खातून कुलपति पद की दावेदार थीं। चयन प्रक्रिया की अध्यक्षता स्वयं प्रो. गुलरेज कर रहे थे। उन्होंने इसे हितों के टकराव और पारदर्शिता के खिलाफ बताया था।
कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि याचिका में लगाए गए आरोप ठोस प्रमाणों से समर्थित नहीं हैं। इससे पहले भी एएमयू कुलपति की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कई याचिकाएं दाखिल हुई थीं। इनमें जामिया मिल्लिया इस्लामिया दिल्ली के सैयद अफजल मुर्तजा रिजवी भी शामिल थे। सभी की ओर से प्रो.नईमा खातून के नाम को लेकर घोर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। उनकी नियुक्ति से पहले उनके पति कार्यवाहक कुलपति थे। हालांकि, इन सभी विवादों के बीच प्रो.नईमा खातून एएमयू की पहली महिला कुलपति बन गईं।