इलाहाबाद। त्वरित न्याय के लिए गठित स्थायी लोक अदालत में पिछले चार माह से चेयरमैन का पद रिक्त है। तीन सदस्यीय लोक अदालत की पीठ का काम वर्तमान में सिर्फ दो सदस्यों के भरोसे चल रहा है जिनको सिर्फ सुलह समझौते वाले वाद का निस्तारण करने का अधिकार है। चेयरमैन का पद रिक्त होने से तमाम ऐसे वादों का निस्तारण अटक गया है जिनमें सुलह समझौते की गुंजाइश नहीं है और पीड़ित को अदालत के फैसले से ही न्याय मिल सकता है।
स्थायी लोक अदालत इलाहाबाद के अध्यक्ष गत आठ मार्च को सेवानिवृत्त हो गए। तब से इस पद पर नए चेयरमैन की नियुक्ति नहीं हो सकी है।
मौजूदा समय में लोक अदालत में 135 मुकदमे लंबित हैं इनमें से 25 मुकदमे जून माह में दाखिल हुए हैं जबकि 110 पुराने मामले हैं। चेयरमैन की गैरमौजूदगी में लोक अदालत का काम दो सदस्यों के भरोसे चल रहा है मगर सदस्यों को सिर्फ उन मामलों में फैसला देने का अधिकार है जिनमें सुलह समझौते से निस्तारण संभव है। जबकि स्थायी लोक अदालत में बिजली विभाग, बीमा कंपनियों, नगर निगम, एडीए जैसे तमाम लोक सेवाओं से संबंधित मामले आते हैं। चूंकि इसकी प्रक्रिया काफी सरल और सस्ती है तथा निस्तारण प्रक्रिया भी अपेक्षाकृत तेज है इसलिए लोग जल्द न्याय की उम्मीद में स्थायी लोक अदालत में वाद दाखिल करते हैं। इसके प्रति जागरूकता बढ़ने से इधर यहां मुकदमों की संख्या भी बढ़ी है।
सदस्यों ने कराया समझौता
स्थायी लोक अदालत के सदस्यों ने सोमवार को मीरापुर के आशु पांडेय द्वारा दाखिल परिवाद में समझौता कराया। आशु की बोलेरो जीप 20 दिसंबर 2013 को चोरी हो गई थी। जीप का बीमा 21 दिसंबर 2013 तक रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी से था। आशु ने तीन लाख 76 हजार रुपये का बीमा दावा किया था मगर कंपनी इसे देने को तैयार नहीं थी। स्थायी लोक अदालत में दोनों पक्षों में समझौता हुआ और बीमा कंपनी 25 फीसदी कम की शर्त पर दो लाख 82 हजार रुपये के भुगतान को तैयार हो गई। भुगतान न होने पर आदेश की तिथि से सात प्रतिशत की दर से ब्याज देना होगा।