मंगलवार को पूर्णिमा पर लगने वाला चंद्रग्रहण साल का अंतिम ग्रहण रहा। ग्रहण काल दिन में 2:39 बजे से आरंभ हुआ, लेकिन प्रयागराज में यह ग्रहण शाम 5:15 बजे लगा। इसका मोक्ष शाम 6:19 बजे हुआ। ऐसे में सुबह 8:15 बजे ही सूतक लग गया।
कार्तिक पूर्णिमा पर मंगलवार को संगमनगरी में ग्रस्तोदय चंद्रग्रहण का दुर्लभ नजारा एक घंटा चार मिनट तक देखा गया। ग्रहणकाल में ही चंद्रोदय हुआ। इस दौरान ग्रहण में चंद्रमा की झलक पाने के लिए लोग छतों, पार्कों के अलावा संगम की रेती से टकटकी लगाए रहे। मोक्ष के बाद ग्रहण स्नान कर लोगों ने दान किया। मंगलवार को पूर्णिमा पर साल अंतिम ग्रहण दिन में 2:39 बजे से आरंभ हुआ, लेकिन प्रयागराज में यह ग्रहण शाम 5:15 बजे चंद्रोदय के साथ दिखा।
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मोक्ष शाम 6:19 बजे हुआ। इससे पहले लोग संगम तट पर चंद्रमा के मोक्ष के लिए जतन करते रहे। संगम पर कहीं जप तो कहीं भजन-कीर्तन होता रहा। मोक्ष होने के साथ ही ग्रहण स्नान शुरू हुआ। जयकारे गूंजने लगे। संगम के अलावा रामघाट, दशाश्वमेध घाट, बलुआ घाट, अरैल और झूंसी में ग्रहण स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रही। मोक्ष के बाद रात करीब आठ बजे संगम स्थित बड़े हनुमान मंदिर के कपाट खुले। महंत बलवीर गिरि महराज ने पूजा, आरती की।
इसी तरह मीरापुर स्थित शक्तिपीठ ललिता देवी मंदिर, शक्तिपीठ कल्याणी देवी, मां अलोप शंकरी देवी के अलावा वेणी माधव मंदिर समेत शहर के अन्य मंदिरों की साफ-सफाई कराई गई और फिर पूजन-अर्चन के बाद दर्शन आरंभ हुआ।