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Prayagraj: मुख्तार अंसारी की पत्नी का भाई सात दिन की ईडी कस्टडी में सौंपा, मनी लॉन्ड्रिंग केस में चल रही जांच

Tue, 08 Nov 2022 06:54 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज

सार

कोर्ट ने कहा कि आरोपित को ईडी आठ नवंबर की शाम पांच बजे से 15 नवंबर की दोपहर दो बजे तक कस्टडी में पूछताछ इत्यादि के लिए सौंपा जाता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपित को हिरासत में लेने के एवं हिरासत अवधि समाप्त होने पर न्यायिक अभिरक्षा में सौंपने के वक्त दोनों ही समय आरोपित का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा।
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सरजील और मुख्तार अंसारी। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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जिला जज संतोष राय ने मनी लांड्रिंग मामले में मुख्तार अंसारी के रिश्तेदार आतिफ रजा उर्फ सरजील रजा को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कस्टडी में सात दिनों के लिए सौंपने का आदेश दिया है।

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कोर्ट ने कहा कि आरोपित को ईडी आठ नवंबर की शाम पांच बजे से 15 नवंबर की दोपहर दो बजे तक कस्टडी में पूछताछ इत्यादि के लिए सौंपा जाता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपित को हिरासत में लेने के एवं हिरासत अवधि समाप्त होने पर न्यायिक अभिरक्षा में सौंपने के वक्त दोनों ही समय आरोपित का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा।

अदालत में यह स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस अवधि के दौरान किसी भी प्रकार का कोई थर्ड डिग्री प्रयोग कर उत्पीड़न नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही अदालत ने आरोपित को एक सुविधा भी प्रदान की है कि वह  इस अवधि के दौरान अपने अधिवक्ता से संपर्क कर सकता है लेकिन अधिवक्ता ईडी की कार्रवाई में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।

इस मामले में ली गई कस्टडी रिमांड

ईडी की तरफ से सहायक निदेशक सौरभ कुमार ने कस्टडी रिमांड अर्जी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया ईडी के अधिवक्ता ओम प्रकाश मिश्रा ने आरोपी आतिफ को 14 दिन की कस्टडी रिमांड में भेजने की माग किया। तर्क दिया कि आय से अधिक संपत्ति रखने के दो मामलों में अभियुक्त है। जिसकी प्राथमिकी गाजीपुर और मऊ में दर्ज की गई है। 

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जिला शासकीय अधिवक्ता गुलाब चंद्र अग्रहरि ने बताया कि अभियुक्त के खिलाफ गाजीपुर में एक भूमि जबरदस्ती अर्जित कर उस पर गोदाम बनाने के मामले में आईपीसी की धारा 419, 420, 433, 467, 468, 120बी और 3/4 धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले में ईडी पूछताछ कर रही है। मामला 15.31 करोड़ रुपये से अधिक का है।

बचाव पक्ष की ओर से इसका विरोध किया गया कि उन्हें भी मामले से जुड़े सभी प्रपत्र उन्हें मुहैया कराए जाए, जिससे की वह अभियुक्त की ओर से जवाब दाखिल कर सकें उन्होंने अधिवक्ता से मिलने की छूट की भी मांग की।

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