बंदरोें के उत्पात से टैगोर टाउन इलाके की एक बड़ी आबादी इन दिनाें घरों में नजरबंद सी हो गई है। लोगों को दिन में घरों के दरवाजे-खिड़की तक बंद रखनी पड़ती है। इसके बावजूद बंदरों की टोली बाहर रखे गमले, वॉश बेसिन आदि सामान तोड़ डालती है।
लोग छतों पर कपड़े तक नहीं सुखा पाते। सबसे अधिक नुकसान फल-फूल के पौधों के शौकीनों को उठानी पड़ रही है। बंदरों का झुंड जिधर से गुजरता है उधर की बागवानी को तहस-नहस कर देता है।
टैगोर टाउन निवासी इविवि के बाॅयो केमिस्ट्री विभाग से सेवानिवृत्त डॉ. पूनम चंद्र मित्तल का कहना है कि आए दिन बंदरों का झुंड घर के बगीचे में घुस आता है। बंदर यहां फल-फूल के पौधे, गमले आदि नष्ट कर देते हैं। आने-जाने वालों पर आक्रामक हो जाते हैं। यह उत्पात लगभग हर दिन घंटों चलता है। बंदरों के भय से घर निकलना दुश्वार हो गया है। ऐसे में समझ नहीं आता इस समस्या से कैसे छुटकारा मिले।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदर कई लोगों को काट भी चुके हैं। जिन लोगों के घरों में बागवानी की जगह है, वे आम, अमरूद, केला आदि पौधे लगाने की हिम्मत तक नहीं कर पाते। जहां पहले से ये पौधे लगे हैं, उन परिसरों को बंदरों ने उजाड़ डाला है। ये घरों के बाहर रखे कूड़े तक को बिखेर देते हैं। लोगों का कहना है कि नगर निगम और वन विभाग को इस समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए।
इस समस्या पर अपर नगर आयुक्त शादाब असलम का कहना है कि बंदर जंगली जानवर है। इसे पकड़ने की जिम्मेदारी वन विभाग की है। नगर निगम गाय, भैंस, कुत्ता आदि जानवर ही पकड़ सकता है।