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UP : अवैध बेदखली पर पेशकार पर एक लाख का जुर्माना, कोर्ट ने कहा-पुलिस और डीएम महिला को घर पर दिलाएं कब्जा

Tue, 06 Jan 2026 02:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध बेदखली पर नाराजगी जताते हुए प्रतिवादी पेशकार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने सिद्धार्थ नगर की सोनी की याचिका पर सुनवाई के दौरान बेदखली को कानून की प्रक्रिया और राज्य की प्रशासनिक शक्तियों का घोर दुरुपयोग करार दिया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध बेदखली पर नाराजगी जताते हुए प्रतिवादी पेशकार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने सिद्धार्थ नगर की सोनी की याचिका पर सुनवाई के दौरान बेदखली को कानून की प्रक्रिया और राज्य की प्रशासनिक शक्तियों का घोर दुरुपयोग करार दिया। वहीं, डीएम और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 48 घंटे में पीड़िता को घर पर कब्जा दिलाएं।

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सोनी के ससुर की मौत के बाद पति और देवर ने घर का एक हिस्सा संदीप गुप्ता (जो कोर्ट में पेशकार है) को बेच दिया था पर संपत्ति का कोई कानूनी बंटवारा नहीं हुआ था। आरोप है कि इसके बावजूद संदीप ने अपने प्रभाव से पुलिस-राजस्व टीम के साथ मिलकर 18 जुलाई 2025 को याचिकाकर्ता और उसके तीन बच्चों को जबरन घर से निकाल दिया। इस बेदखली के खिलाफ सोनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने संदीप के पक्ष में कब्जा बहाली के लिए दायर आवेदन को बिना किसी नोटिस के उसी दिन स्वीकार कर लिया। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है। प्रतिवादी पेशकार के प्रभाव में आकर विवादित आदेश पारित किया गया। वहीं, प्रतिवादी के अधिवक्ता ने दलील दी कि मकान के सह-स्वामियों से पंजीकृत बैनामा के तहत मकान खरीदा गया था और उसी समय उसे कब्जा दे दिया गया था। उसने ट्रायल कोर्ट के आदेश के पालन में कब्जा लिया है।

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जज के खिलाफ जांच शुरू करने का आग्रह

खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि प्रशासनिक अधिकारियों के पास किसी को घर से बेदखल करने के लिए संयुक्त टीम बनाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था। कोर्ट ने संदीप पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह राशि याचिकाकर्ता को अवैध बेदखली और मानसिक प्रताड़ना के मुआवजे के रूप में एक सप्ताह के भीतर देनी होगी। इसके साथ ही कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की ओर से बिना किसी ठोस सबूत के जल्दबाजी में अंतरिम स्थगन आदेश पारित करने पर नाराजगी जताई है। वहीं, मुख्य न्यायाधीश से संबंधित जज के खिलाफ अनुशासनात्मक जांच शुरू करने पर विचार करने का अनुरोध भी किया गया है।
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