चेहरे से पहचान कर जमा होगा प्रमाण पत्र
संयुक्त सचिव ने बताया कि चेहरे की पहचान वाली सुविधा से पेंशनभोगी घर बैठे कभी भी अपना जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं। इसके लिए आधार से जुड़ी पहचान की सुविधा का इस्तेमाल किया जाता है।
उन्होंने बताया कि जीवन प्रमाण पत्र बनाने की सुविधा वर्ष 2014 में शुरू हुई थी। पहले अंगूठे के निशान या आंखों की पुतली से पहचान की जाती थी। उम्र बढ़ने के साथ कई बुजुर्गों को इन तरीकों से पहचान कराने में परेशानी होने लगी। इसे देखते हुए वर्ष 2019-20 में चेहरे की पहचान से प्रमाण पत्र बनाने की सुविधा शुरू की गई। अब इसी सुविधा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
एक लाख से अधिक शिविर लगाने की तैयारी
ध्रुबज्योति सेनगुप्ता ने बताया कि पिछले साल पूरे अभियान के दौरान करीब 75 हजार शिविर लगाए गए थे। इस बार इनकी संख्या एक लाख से अधिक करने की तैयारी है। इसके लिए देश के सभी राज्यों, जिलों और प्रमुख उपमंडलों तक शिविर लगाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार भी अभियान में पूरा सहयोग कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य उन बुजुर्ग पेंशनभोगियों तक सुविधा पहुंचाना है, जिन्हें डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करने में परेशानी होती है।
डिजिटल प्रमाण पत्र को बताया सुरक्षित
डिजिटल धोखाधड़ी की आशंका पर संयुक्त सचिव ने कहा कि जीवन प्रमाण पत्र आधार के माध्यम से सत्यापित होता है। चेहरे की पहचान करने वाला ऐप कई विशेषताओं के आधार पर व्यक्ति की पहचान करता है। उन्होंने डिजिटल तरीके को सुरक्षित बताते हुए कहा कि कागज पर प्रमाण पत्र जमा करने में उसके खोने या उसकी प्रति का गलत इस्तेमाल होने की आशंका रहती है।
उन्होंने बताया कि पेंशनभोगी अपना जीवन प्रमाण पत्र बनवाने के लिए नजदीकी शिविर, डाकघर या बैंक शाखा में जा सकते हैं। वहां मौजूद कर्मचारी और अधिकारी प्रमाण पत्र बनाने में मदद करेंगे। उन्होंने पेंशनभोगियों से समय पर जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की अपील की, ताकि उनकी पेंशन बिना किसी रुकावट के मिलती रहे।