फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

High Court : लापरवाही पर सवा दो करोड़ की वसूली का दंड अंतरात्मा को झकझोरने वाला, कोर्ट ने रद्द किया नोटिस

Sat, 11 Apr 2026 05:16 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के एक लेखाकार पर लगाए गए सवा दो करोड़ रुपये की वसूली के दंड को रद्द कर दिया है।
विज्ञापन
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के एक लेखाकार पर लगाए गए सवा दो करोड़ रुपये की वसूली के दंड को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि केवल लापरवाही के आधार पर कर्मचारी के खिलाफ इतनी बड़ी राशि की वसूली का दंड न सिर्फ अत्यंत असंगत है, बल्कि अदालत की अंतरात्मा को झकझोरने वाला है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की अदालत ने शामली में तैनात लेखाकार सत्यव्रत की याचिका पर दिया है।

विज्ञापन


याची पर आरोप था कि 2016 से 2021 के बीच शामली में तैनाती के दौरान उन्होंने एक निजी पेपर मिल पर बकाया 2.14 करोड़ रुपये की वसूली के लिए सक्रियता नहीं दिखाई। विभाग ने तर्क दिया कि लेखाकार की लापरवाही के कारण विभाग को वित्तीय हानि हुई और दंड स्वरूप उनसे पूरी बकाया राशि वसूलने का आदेश जारी कर दिया। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि जिस बकाया राशि के लिए लेखाकार को दोषी ठहराया गया, उसका नोटिस 2009 में जारी हुआ था, जबकि याची की तैनाती वहां 2016 में हुई। विभाग ने केवल एक कर्मचारी पर गाज गिराई, जबकि पहले से तैनात लेखाकारों और उच्च अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं की गई। कोर्ट ने यह भी पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो कि याची ने इस लापरवाही से कोई व्यक्तिगत लाभ प्राप्त किया है। कोर्ट ने याची के खिलाफ सवा दो करोड़ की वसूली का आदेश रद्द कर दिया। जबकि, परिनिंदा और वेतन वृद्धि रोकने की सजा को बरकरार रखा।

विज्ञापन

अदालत की टिप्पणी

लापरवाही के मामले में अदालत का हस्तक्षेप तब उचित होता है, जब लगे कि अनुशासनात्मक प्राधिकारी ने छोटी सी बात को सुलझाने के लिए बहुत बड़ा कदम उठाया है। दिया गया दंड अत्यधिक या चौंकाने वाला है, यह न सिर्फ मनमानी है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। - हाईकोर्ट
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें