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Prayagraj : पीडीए ने शत्रु संपत्ति पर बसा दी कॉलोनी, टीम ने सदर तहसील में संपत्तियों का किया सर्वे

Wed, 29 Nov 2023 04:41 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

चार दिनों से प्रयागराज में डटी भारत सरकार की टीम ने पहले से चिह्नित 28 शत्रु संपत्तियों का निरीक्षण किया। इनमें से 21 पर पीडीए काबिज है। पीडीए ने इन संपत्तियों पर कॉलोनियां विकसित करने के साथ पार्क भी बना रखे हैं।
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शत्रु संपत्ति की जांच करती भारत सरकार की टीम। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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शत्रु संपत्ति को लेकर रोजाना नए-नए मामले सामने आ रहे हैं। खास यह कि कई संपत्तियों पर सरकारी विभाग ही काबिज हैं, लेकिन इन विभागों को इस बात की जानकारी ही नहीं है कि यह शत्रु संपत्ति है। प्रयागराज विकास प्राधिकरण ही 21 शत्रु संपत्तियों पर काबिज है। खास यह कि इन पर कॉलोनियां भी बसा दी गई हैं।

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चार दिनों से प्रयागराज में डटी भारत सरकार की टीम ने पहले से चिह्नित 28 शत्रु संपत्तियों का निरीक्षण किया। इनमें से 21 पर पीडीए काबिज है। पीडीए ने इन संपत्तियों पर कॉलोनियां विकसित करने के साथ पार्क भी बना रखे हैं। अब पीडीए से इस बाबत पूरा विवरण मांगा गया है। टीम ने नीम सराय में भी पांच संपत्तियों का निरीक्षण किया। पांचों संपत्तियां मोहम्मद हनीफ के नाम पर थीं, जो पाकिस्तान चले गए। अब इनपर रिश्तेदार काबिज हैं। उन्होंने जमीन का ज्यादातर हिस्सा बेच भी दिया है और उन पर निर्माण भी हो चुके हैं।

वहीं, जानसेनगंज में भी करोड़ों की शत्रु संपत्ति मिली है। 4000 वर्ग फीट के भूखंड पर भवन बनाकर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। दांदूपुर में भी एक संपत्ति का निरीक्षण किया गया, जिसकी कीमत 25 लाख रुपये बताई जा रही है। उस पर भी मकान बन गया है। सर्वे टीम में शामिल अफसरों के अनुसार सदर तहसील में कई अन्य शत्रु संपत्तियों के मिलने की उम्मीद है। अब तक मिली संपत्तियों का विवरण तैयार किया जा रहा है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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शत्रु संपत्ति पर बने सात भवनों को मिल चुका है मकान नंबर

शत्रु संपत्ति की पहचान नगर निगम भी नहीं कर सका है। सदर तहसील में पहले से चिह्नित 28 संपत्तियों के अलावा सात अन्य भूखंड भी मिले हैं। इन पर मकान भी बन गए हैं। खास यह कि नगर निगम की ओर से इन्हें मकान नंबर भी जारी किया जा चुका है। सर्वे टीम की ओर से नगर निगम को पत्र लिखकर इन संपत्तियों का विवरण मांगा गया है। यह भी जानकारी मांगी गई है कि इन्हें मकान नंबर कब जारी हुआ। इस बाबत सर्वे टीम और नगर निगम के अफसरों की बुधवार को बैठक प्रस्तावित है।

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