लोकसेवा आयोग अध्यक्ष को हटाने के लिए छात्रों के आंदोलन के दौरान बेली अस्पताल में भाजपा सांसद विनोद सोनकर से बदसलूकी मामले में जांच और कार्रवाई की बजाय प्रशासन ने उल्टी चाल चल दी है। सीडीओ और एसपी क्राइम की जांच रिपोर्ट आने से पहले डीएम ने धरना देने वाले सांसदों और भाजपा कार्यकर्ताओं पर कानूनी शिकंजा कसने के लिए उल्टा मजिस्ट्र्ेट से जांच शुरू करा दी है।
आंदोलन के मामले में गिरफ्तार छात्रों से मिलने की खातिर कौशाम्बी के भाजपा सांसद विनोद सोनकर बेली अस्पताल पहुंचे थे जहां आरोप है कि सीओ के आदेश पर पुलिसवालों ने उनके साथ बदसलूकी की। सोनकर के साथ ही फूलपुर के भाजपा सांसद केशव प्रसाद मौर्या ने दोषी पुलिसवालों पर कार्रवाई समेत छह मांगों को लेकर डीएम आवास के सामने धरना दिया। वहां डीएम ने उन्हें भरोसा दिया गया था कि सीडीओ और एसपी क्राइम से तीन दिन में जांच रिपोर्ट लेकर फैसला किया जाएगा। मगर मामले ने नया मोड़ लिया है।
रविवार को डीएम भवनाथ सिंह ने बताया कि मामले की मजिस्ट्र्ेट से जांच कराई जा रही है। पुरानी जांच टीम की रिपोर्ट को मजिस्ट्रेट की जांच में शामिल कर लिया गया है। मजिस्ट्रेट को जिन चार बिंदुओं पर जांच करनी है, उसमें छात्रों ने किन परिस्थितियों में उग्र प्रदर्शन किया, बेली में हंगामा होने का कारण, डीएम निवास के बाहर धरने पर कौन-कौन बैठे, धारा 144 के बावजूद कौन लोग जुटे और कानून का उल्लंघन करते हुए माइक के इस्तेमाल आदि विषय शामिल हैं। नए आदेश से साफ है कि बदसलूकी करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की बजाय धरना देने वाले भाजपाइयों पर शिकंजा कसने की तैयारी है।