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सुप्रीम कोर्ट पहुंची पीसीएस जे भर्ती में धांधली की शिकायत

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PCS J exam dispute
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ओबीसी वर्ग का दिव्यांग अभ्यर्थी कटऑफ से अधिक अंक पाकर भी चयन से हुआ वंचित
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यूपीपीएससी ने दिव्यांग मानने से किया इनकार, अभ्यर्थी ने उच्चतम न्यायालय में लगाई गुहार
प्रयागराज। पीसीएस जे भर्ती में गड़बड़ी की शिकायत सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। एक अभ्यर्थी की ओर से की गई शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से एसएमएस के माध्यम से अभ्यर्थी को सूचना भेजी गई है कि उनकी शिकायत प्राप्त हो गई है और वह वेबसाइट पर इसका अवलोकन कर सकते हैं।
अभ्यर्थी आलोक कुमार चौरसिया ने सुप्रीम कोर्ट को शिकायती पत्र भेजकर पीसीएस जे 2018 के अंतिम चयन परिणाम में धांधली का आरोप लगाया है। अभ्यर्थी ने पत्र में कहा है कि 20 जुलाई को अंतिम चयन परिणाम और 12 सितंबर को कटऑफ अंक जारी किए गए थे। इसमें दिव्यांग वर्ग से आने वाले सफल अभ्यर्थियों का न्यूनतम कटऑफ अंक 453 है और आलोक कुमार इसी श्रेणी के तहत ‘ओए’ एवं ‘ओएल’ के ओबीसी अभ्यर्थी हैं। उनका 463 अंक होने के बावजूद चयन नहीं किया गया, क्योंकि वह पैर से 45 फीसदी एवं हाथ से पांच फीसदी दिव्यांग हैं।
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आलोक के मुताबिक वह अब आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार से मिले तो उन्होंने भी चयन न होने का यही कारण बताया। आयोग ‘ओए’ एवं ‘ओएल’ वाले दिव्यांग अभ्यर्थी को सिविल जज के कार्य के लिए उपयुक्त नहीं मानता है। आलोक का कहना है कि उन्होंने जब अध्यक्ष से पूछा कि अगर वह उपयुक्त अभ्यर्थी नहीं हैं तो उन्हें साक्षात्कार के लिए क्यों बुलाया गया तो जवाब मिला कि उन्होंने मुख्य परीक्षा तो उत्तीर्ण की लेकिन अंतिम चयन सूची में ओबीसी में जगह नहीं बना पाए। अगर ओसीसी वर्ग में जगह बना लेते तो चयन हो जाता।
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आलोक ने इसी जवाब और विज्ञापन को आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट को भेजे पत्र में कहा है कि अगर वह ओबीसी श्रेणी का न्यूनतम कटऑफ अंक से अधिक पा जाते तो सिविल जज के लिए उपयुक्त होते लेकिन दिव्यांग वर्ग में क्वालीफाई किया, इसलिए वह पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं। आलोक कहना है कि विज्ञापन में भी कहीं उल्लेख नहीं था कि ‘ओए’ एवं ‘ओएल’ दिव्यांग अभ्यर्थी पद के लिए उपयुक्त नहीं है। आयोग ने दिव्यांग वर्ग के तहत उनका आवेदन शुल्क स्वीकार किया लेकिन अंत में उन्हें दिव्यांग नहीं माना गया जबकि वह दिव्यांग हैं। आलोक ने मांग की है कि उनके आवेदन का स्वत: संज्ञान लेने हुए उनके साथ न्याय किया जाए।
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