ऐसे में बीडीओ के इन रिक्त पदों पर अन्य विभागों के राजपत्रित अधिकारियों से भरे जाने के लिए नियमावली में संशोधन का निर्णय लिया गया है। मुख्य सचिव की ओर से यह पत्र जारी किए जाने के बाद पीसीएस-2020 के तहत बीडीओ के पदों पर भर्ती फंस गई है, जबकि बीडीओ के पदों पर भर्ती अब तक पीसीएस परीक्षा के माध्यम से ही होती रही है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से बीडीओ के पद बड़ी संख्या में खाली हैं और इन रिक्त पदों पर भर्ती के लिए ग्राम्य विकास विभाग की ओर से पदों का अधियाचन नहीं भेजा जा रहा है।
इस मसले पर प्रतियोगी छात्रों ने अपना विरोध भी दर्ज कराया था और आरोप लगाया था कि बीडीओ के पदों पर दूसरे विभागों के अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। इस मसले पर शासन की ओर से चार सितंबर 2018 को एक पत्र भी जारी किया गया था, जिसमें भ्रष्टाचार के मामले का जिक्र करते हुए रिक्त पदों पर दूसरों विभागों के अफसरों को अतिरिक्त प्रभार न देने की बात कही गई थी। साथ ही रिक्त पदों का अधियाचन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजकर भर्ती कराए जाने को कहा गया था।
शासन की ओर से सितंबर 2018 में पत्र जारी होने के बाद पीसीएस के अभ्यर्थियों में उम्मीद जगी थी कि बीडीओ के रिक्त पदों पर जल्द ही भर्तियां होंगी, लेकिन अब प्रतिनियुक्ति से पद भरे जाने का निर्णय होने से अभ्यर्थियों के लिए बीडीओ के पद पर भर्ती के रास्ते बंद हो गए हैं। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय ने सवाल उठाए हैं कि आखिर शासन स्तर पर बैठे अफसरों को बीडीओ के पद से इतना लगाव क्यों है? पीसीएस परीक्षा के माध्यम से बीडीओ के रिक्त पदों पर भर्ती की व्यवस्था है तो प्रतिनियुक्ति से पद भरे जाने की क्या जरूरत है? इससे शासन की मंशा पर भी सवाल उठते हैं। अवनीश की मांग है कि बीडीओ के पद पीसीएस परीक्षा के माध्यम से ही भरे जाएं।