PCS candidates put emphasis on CM
प्रयागराज। पीसीएस-2019 की मुख्य परीक्षा से पांच वैकल्पिक विषयों को बाहर किए जाने के मामले में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने हाईकोर्ट में हलफनामा दिया है कि इस बाबत शासन को प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन मंजूरी नहीं मिली है। इनमें विषयों में रक्षा अध्ययन और समाज कार्य जैसे दो प्रमुख विषय भी शामिल हैं, जिन्हें पीसीएस मुख्य परीक्षा में शामिल कराने के लिए अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री तक जोर लगा दिया है।
पीसीएस के अभ्यर्थियों ने पहले ग्राम्य विकास विभाग एवं समग्र ग्राम विकास मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ‘मोती सिंह’ से गुहार लगाई कि पीसीएस मुख्य परीक्षा के वैकल्पिक विषय रक्षा अध्ययन एवं समाज कार्य को न हटाया जाए। अभ्यर्थियों की मांग पर मंत्री मोती सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आग्रह किया कि इस मसले पर समुचित विचार कर लें। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस मसले पर नियमानुसार कार्यवाही के लिए मामले को अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव कार्मिक के पास भेज दिया गया है।
अभ्यर्थी अब शासन स्तर पर दबाव बना रहे हैं कि रक्षा अध्ययन और समाज कार्य विषय को पीसीएस मुख्य परीक्षा से बाहर न किया जाए। वहीं, आयोग पांच वैकल्पिक विषयों को हटाए जाने के प्रस्ताव पर मंजूरी का इंतजार कर रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग ने पीसीएस-2019 के विज्ञापन में अचानक रक्षा अध्ययन और समाज कार्य विषय को हटाने का निर्णय ले लिया, जबकि पीसीएस में ज्यादातर अभ्यर्थी इन्हीं दो विषयों को विकल्प के तौर पर चुनते हैं। अभ्यर्थी कई वर्षों ने इन वैकल्पिक विषयों के साथ पीसीएस की तैयारी कर रहे हैं। इन विषयों के हटने से तमाम योग्य अभ्यर्थियों के पीसीएस में चयन के अवसर कम हो जाएंगे। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि शासन स्तर पर उनकी बात सुनी जाएगी।