सिविल सर्विसेज भर्ती में हिंदी पट्टी के प्रतियोगियों का सूखा अब दूर होने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग समेत अन्य राज्य आयोगों ने सिविल सेवा की तर्ज पर पीसीएस कराने का निर्णय लिया है। ऐसे में प्रतियोगियों को सिविल सेवा तथा पीसीएस के लिए अलग-अलग तैयारी नहीं करनी होगी। इसका प्रस्ताव लोक सेवा आयोग की ओर से शासन को भेज दिया गया है। चेयरमैन डॉ. अनुरुद्ध यादव का कहना है कि पीसीएस-2017 से ही इस प्रारूप को लागू करने के लिए आयोग पूरी तरह से तैयार है। सरकार और शासन में संबंधित लोगों से बात की जाएगी।
आयोगों ने प्रश्नपत्रों के स्तर में सुधार की भी घोषणा की है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस-जे, समीक्षा अधिकारी-सहायक समीक्षा अधिकारी आदि भर्ती परीक्षाओं में यह सुधार देखने को भी मिला। दोनों भर्तियों की प्रारंभिक परीक्षा का पेपर स्तरीय रहा। आयोगों के इस पहल का प्रतियोगियों के साथ विशेषज्ञों ने भी स्वागत किया है। सिविल सर्विसेज, पीसीएस समेत कई भर्तियों की मुख्य परीक्षा दे चुकी मोनिका पांडेय का कहना है कि एक ही तरह की भर्ती के लिए उन्हें दोहरी तैयारी करनी पड़ती है। सिविल सेवा की तर्ज पर पीसीएस कराने की उनकी मांग पूरी होनी ही चाहिए।
मिलेगा बराबरी का मौका
सिविल सर्विसेज का पैटर्न पीसीएस में लागू करने के बाद नए प्रतियोगियों के लिए भी बराबर के अवसर होंगे। अभी मुख्य परीक्षा में दो वैकल्पिक विषय हैं। ऐसे में परास्नातक तथा विधि स्नातक प्रतियोगियों को एक और विषय चुनना होता है। इसकी वजह से लंबी तैयारी की जरूरत होती है। जबकि, नए प्रारूप में सिर्फ एक वैकल्पिक विषय होगा। दूसरे विषय की जगह सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र बढ़ जाएंगे। सामान्य अध्ययन के प्रश्न में निर्णय लेने की क्षमता, नैतिकता आदि का भाग बढ़ जाएगा। माना जा रहा है कि इस बदलाव से पीसीएस में नए लोगों के लिए भी अवसर बढ़ जाएंगे।
जीएस में होंगे विस्तृत उत्तरीय प्रश्न, दूर होगा विवाद
हालांकि अभी फैसला नहीं हुआ है लेकिन आयोग ने यह स्पष्ट जरूर कर दिया है कि पीसीएस मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के सभी प्रश्नपत्र विस्तृत उत्तरीय होंगे। अभी दोनों पेपर वस्तुनिष्ठ आधारित होते हैं। इसमें प्रश्नों के जवाब को लेकर लगातार विवाद बना हुआ है। ऐसे में नए प्रारूप में विस्तृत उत्तरीय आधारित पेपर होने पर इस तरह के विवाद भी दूर हो जाएंगे।
‘सिविल सेवा की तर्ज पर पीसीएस कराने की पहल स्वागत योग्य है। इससे यहां के प्रतियोगियों को निश्चित लाभ होगा। सिविल सेवा के रिजल्ट में भी इसका लाभ देखने को मिलेगा। अच्छे और योग्य अभ्यर्थियों के चयन के लिए सिविल सेवा के सिलेबस में भी परिवर्तन की जरूरत है। सिर्फ सामान्य जानकारी के आधार पर चयन से योग्य प्रशासन की तलाश पूरी नहीं होगी। एक योग्य प्रशासन के सभी गुणों को ध्यान में रखकर उसे सिलेबस में शामिल करना होगा।’
प्रो.जटाशंकर, दर्शनशास्त्र-इविवि
अधिसूचना जारी होने पर लटक जाएगा प्रस्ताव!
लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा की तर्ज पर पीसीएस कराने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है लेकिन इस पर जल्द फैसला नहीं होने की वजह से कई तरह की आशंकाओं ने भी जन्म ले लिया है। फरवरी में विधानसभा चुनाव संभावित है। एक-दो दिन में इसकी अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है। ऐसे में यह प्रस्ताव लटक सकता है। यदि यह फैसला भी आचार संहिता के दायरे में आया तो फिर नई सरकार आयोग के इस प्रस्ताव पर निर्णय लेगी। ऐसे में पीसीएस-2017 का नोटिफिकेशन भी लटक सकता है।