एक घंटे तक चले धरना-प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन के हस्तक्षेप से प्रतियोगी छात्रों का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आयोग के सचिव जगदीश ने मिलने पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में शामिल संदीप सिंह, अलोक सिंह, विवेक उपाध्याय, प्रतिभा और पंकज सिंह ने सचिव के समक्ष प्रतियोगी छात्रों की चार प्रमुख मांगें रखीं। उनकी मांगें थीं कि आयु सीमा में कटौती और अवसर में बाध्यता लागू न की जाए, अवर अधीनस्थ की परीक्षा पूर्व की भांति आयोग कराए, पीसीएस प्री में पद के मुकाबले 13 गुना की जगह पहले की तरह 18 गुना अभ्यर्थियों को पास किया जाए और पीसीएस मुख्य परीक्षा में पूर्व की भांति समाज कार्य एवं रक्षा अध्ययन विषय को शामिल किया जाए।
वार्ता के दौरान सचिव ने छात्रों को बताया कि आयु सीमा में कटौती और अवसर की बाध्यता लागू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। पीसीएस प्री में 13 गुना अभ्यर्थियों को पास किए जाने का निर्णय आयोग ने लिया है, सो अभ्यर्थियों के प्रत्यावेदन को आयोग के समक्ष रखा जाएगा। समाजकार्य और रक्षा अध्ययन विषय को शामिल किए जाने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस मसले पर हाईकोर्ट को जो भी आदेश होगा, उसका अनुपालन किया जाएगा। जहां तक बात अवर अधीनस्थ परीक्षा के आयोजन की है तो यह मामला शासन स्तर का है। आयोग इस पर निर्णय नहीं ले सकता है। इन आश्वासनों से अभ्यर्थी संतुष्ट नजर आए और उन्होंने प्रदर्शन समाप्त कर दिया।
‘वार्ता के लिए अभ्यर्थी आए थे। उनसे बता दिया गया है कि पीसीएस परीक्षा में आयु सीमा में कटौती और अवसर की बाध्यता को लेकर आयोग ने न तो कोई निर्णय लिया है न ही इस बाबत कोई प्रस्ताव विचाराधीन है। आयोग ऐसा कोई बदलाव नहीं करने जा रहा है।’ जगदीश, सचिव, यूपीपीएससी
पेन-कॉपी के साथ किया सरस्वती पूजन
- आयोग में जुटे हजारों प्रतियोगी अपने साथ पेन-कॉपी भी लेकर पहुंचे थे। प्रतियोगी छात्रों ने वहां सरस्वती पूजन भी किया और शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठे रहे। अभ्यर्थियों का कहना था कि वे सांकेतिक रूप से पेन-कॉपी लेकर पहुंचे हैं ताकि यह संदेश दिया जा सके कि यह आंदोलन आम छात्रों का हैं और इसमें किसी संगठन या राजनैतिक दल का कोई हस्तक्षेप नहीं है।