शासन से शिकायत के बावजूद विभाग नहीं भेज रहा अधियाचन
पीसीएस 2018 में भी केवल छह पद, अभ्यर्थियों की मांग अनसुनी
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने परीक्षाओं को पटरी पर लाने में काफी हद तक सफल रहा लेकिन विभाग भर्ती के लिए पदों का अधियाचन भेजने में लेटलतीफी कर रहे हैं। नतीजा कि खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) के तीन सौ से अधिक पद खाली है और इनमें से ज्यादातर पद पीसीएस-2019 की भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी खाली रह जाएंगे जबकि अभ्यर्थी लगातार मांग कर रहे हैं कि रिक्त पदों पर भर्ती की जाए।
पिछले साल तो बीडीओ के तकरीबन 465 पद खाली थे। हालत यह हो गई थी कि कई ब्लॉकों में बीडीओ के पदों पर अन्य विभागों के ऐसे अफसरों को अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया था, जो इस पद के लिए कहीं से भी अर्हता नहीं रखते थे। वहीं, तमाम बीडीओ को दो से तीन ब्लॉकों की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई थी। शासन तक शिकायत पहुंची थी कि इससे ब्लॉकों में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। शासन ने भी समीक्षा में पाया था कि गड़बड़ी हुई है, जिसके बाद शासन की ओर से निर्देश जारी किए थे कि बीडीओ के पद पर किसी भी ऐसे अफसर को अतिरिक्त प्रभार न दिया जाएगा, जो इसके लिए अर्हता न रखता है।
हालांकि शासन से निर्देश जारी होने के बाद कई पद प्रमोशन से भर दिए गए लेकिन इसके बाद भी तकरीबन 300 पद खाली हैं और कोई खास सुधार भी नहीं हुआ है। पीसीएस 2018 में भी बीडीओ के केवल छह पद हैं। वहीं, पीसीएस 2019 में पदों का पूरा विवरण तो जारी नहीं किया गया है लेकिन डिप्टी कलक्टेर, डिप्टी एसपी समेत अन्य प्रकार के कुल 300 पद हैं। तय है कि ऐसे में पीसीएस-2019 के बाद भी बीडीओ के पद बड़ी संख्या में खाली रह जाएंगे। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय का कहना है कि शासन के हस्तक्षेप के बाद भी ग्राम विकास विभाग अगर पदों का अधियाचन नहीं भेज रहा है तो इसका मतलब है कि पदों को जानबूझकर रिक्त रखा जा रहा है ताकि बंदरबांट होती रहे।