फूलपुर लोकसभा क्षेत्र जातीय समीकरण के लिहाज से पटेल बहुल है। भाजपा एवं सपा जैसे दलों ने इसी समीकरण को ध्यान में रखकर फूलपुर से पटेल प्रत्याशी पर दांव लगाया। कांग्रेस ने फूलपुर में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या करीब तीन लाख है जिसको ध्यान में रखकर मनीष मिश्र पर दांव लगाया जो उल्टा पड़ा। उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रत्यशी रहे मोहम्मद कैफ 58090 की अपेक्षा मात्र 19334 मत ही मिले। ऐसे में कांग्रेस ब्राह्मण मतों को अपनी ओर खींचने में नाकाम रही। ब्राह्मण मतों की आस लगाए बैठे भाजपा प्रत्याशी को भी उनके मत नहीं मिले। सरकार और स्थानीय नेतृत्व के प्रति नाराजगी के चलते ब्राह्मण मतदाताओं ने भाजपा से किनारा कर सपा को समर्थन दिया।
फूलपुर लोकसभा में कुल 1963000 मतदाता हैं, इसमें मात्र सात लाख से अधिक मतदाताओं ने मतदान किया। चुनाव में सबसे निर्णायक यादव 2.5 लाख एवं पटेल तीन लाख मतदाताओं ने सपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कर चुनाव को पूरी तरह से नागेंद्र प्रताप सिंह के पक्ष में कर दिया। भाजपा और सपा प्रत्याशी दोनों पटेल वर्ग से होने के कारण उनके मतों का बंटवारा हुआ और पटेल मतदाताओं ने स्थानीय बनाम बाहरी की बात उठाई, सपा प्रत्याशी को स्थानीय होने का लाभ मिला और भाजपा प्रत्याशी पर भारी पड़ा। जातीय गणित के हिसाब से क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी तीन लाख के आसपास थी।
निर्दलीय प्रत्याशी अतीक अहमद को उम्मीद थी कि वह मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण करके चुनाव को प्रभावित कर सकेंगे परंतु उनकी रणनीति सफल नहीं हो सकी। मुस्लिम मतदाता समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अतीक में बंट गए। इस कारण से भाजपा की मुस्लिम मतों को बांटने की नीति सफल नहीं हो सकी। चुनाव के दौरान ही सपा और बसपा में समझौता हो जाने के बाद क्षेत्र के तीन लाख दलित मतदाताओं ने एकमुश्त सपा के पक्ष में मतदान किया। इस प्रकार सपा के पक्ष में पटेल, यादव, एससी और मुस्लिम मतों के एक साथ आ जाने से बड़ा प्रभाव पड़ा। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में फैले फूलपुर संसदीय क्षेत्र में 50 हजार ठाकुर, 40 हजार बंगाली, 30 हजार ईसाई और 10 हजार पंजाबी मतदाताओं के मत चुनाव में कम मतदान होने के कारण बहुत प्रभाव नहीं छोड़ सके।