रावण के दस सिरों के अंत से दिया संदेश
कार्यक्रम में उस समय विशेष क्षण आया, जब विद्यालय की प्रेसिडेंट डॉ. कृष्णा गुप्ता ने धनुष-बाण से रावण के दस सिरों के प्रतीकात्मक अंत की प्रस्तुति दी। इसके माध्यम से उन्होंने बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया। बच्चों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि रावण के दस सिर हमारे भीतर मौजूद क्रोध, लोभ, अहंकार जैसी बुराइयों के प्रतीक हैं। हमें अपने भीतर की कमियों को दूर कर एक बेहतर इंसान बनने का संकल्प लेना चाहिए।
गरबा की प्रस्तुति पर झूम उठे अभिभावक
उत्सव के अंतिम चरण में रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे बच्चों ने ऊर्जावान गरबा नृत्य प्रस्तुत किया। बच्चों के उत्साह, लयबद्ध कदमों और मनमोहक अंदाज ने दर्शक दीर्घा में बैठे अभिभावकों को भी झूमने पर मजबूर कर दिया। पूरे परिसर में उत्सव और उमंग का माहौल छा गया।
डॉ. कृष्णा गुप्ता ने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्हें आशीर्वचन दिए। हेडमिस्ट्रेस विभा श्रीवास्तव ने सभी अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि त्योहार बच्चों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और अच्छे संस्कारों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती सौम्या जौहरी और श्रीमती शिल्पा निघोसकर ने किया। अंत में ‘जय श्रीराम’ और ‘अंबे माता की जय’ के गगनभेदी जयकारों के साथ दशहरा एवं नवरात्रि उत्सव का भव्य समापन हुआ।