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हाईकोर्ट : चार करोड़ के चढ़ावा के गबन के आरोपी अकाउंटेंट की जमानत खारिज, सदाफलदेव योग संस्थान का मामला

Sun, 18 Oct 2026 04:43 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी स्थित सद्गुरु सदाफलदेव विहंगम योग संस्थान में चार करोड़ रुपये चढ़ावे के गबन के आरोपी अकाउंटेंट की जमानत अर्जी खारिज कर दी। साथ ही ट्रायल कोर्ट को यह निर्देश दिया कि यदि कोई कानूनी बाधा नहीं है तो मुकदमे का शीघ्र निस्तारण किया जाए।
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कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी स्थित सद्गुरु सदाफलदेव विहंगम योग संस्थान में चार करोड़ रुपये चढ़ावे के गबन के आरोपी अकाउंटेंट की जमानत अर्जी खारिज कर दी। साथ ही ट्रायल कोर्ट को यह निर्देश दिया कि यदि कोई कानूनी बाधा नहीं है तो मुकदमे का शीघ्र निस्तारण किया जाए।

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यह आदेश न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की एकल पीठ ने विवेक कुमार की जमानत अर्जी पर दिया है। अभियोजन के अनुसार, विवेक कुमार संस्थान में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत थे। संस्थान की वाराणसी, प्रयागराज और गया समेत कई स्थानों पर शाखाएं हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक, 23 सितंबर 2025 को आरोपी संस्थान के कार्यालय में 20 हजार रुपये के चढ़ावे का हिसाब देने पहुंचा था। इस दौरान उसने एचडीएफसी बैंक की बताई गई एक जमा रसीद प्रस्तुत की।

रसीद देखकर कार्यालय के कर्मचारियों को संदेह हुआ। इसके बाद बैंक शाखा में उसकी जांच कराई गई तो रसीद कथित तौर पर फर्जी पाई गई। अभियोजन का दावा है कि खातों की पड़ताल के दौरान आरोपी की ओर से पहले जमा कराई गई। कई अन्य रसीदें भी फर्जी मिलीं। इसी आधार पर संस्थान की चढ़ावे की रकम में चार करोड़ रुपये से अधिक के कथित गबन का मामला सामने आया।

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बैंक कर्मचारियों को रिश्वत देने और मोबाइल से साक्ष्य मिटाने का आरोप

अभियोजन ने आरोप लगाया कि कथित फर्जीवाड़े को छिपाने के लिए आरोपी ने बैंक कर्मचारियों को रिश्वत देने का प्रयास किया। दावा किया गया कि घटना की रिकॉर्डिंग बैंक के आंतरिक सर्वर पर मौजूद थी।

आरोपी के चार्टर्ड अकाउंटेंट भाई अभिषेक कुमार पर भी गबन में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा, जांच एजेंसी के जब्त करने से पहले आरोपी पर अपना मोबाइल फोन फॉर्मेट कर आपत्तिजनक सामग्री मिटाने का आरोप भी है। इस मामले में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर अक्तूबर 2025 में गिरफ्तार किया गया।
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याची ने दी दलील - झूठा फंसाया गया

याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है। उसका मामले से कोई संबंध नहीं है। कहा उसने संस्थान में करीब 12 वर्षों तक काम किया है। इससे पहले कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। मौजूदा मुकदमा एक अन्य मामले की जवाबी कार्रवाई है। उस मामले में आरोपी के भाई ने संस्थान के प्रभावशाली अधिकारियों पर अपनी पत्नी और डेढ़ साल के बच्चे के अपहरण का आरोप लगाया था।

वहीं, राज्य सरकार के अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी ने संस्थान में भरोसे की स्थिति में रहते हुए धार्मिक चढ़ावे की रकम का चार करोड़ रुपये से अधिक का गबन किया। आरोप है कि कई फर्जी लेन-देन के माध्यम से दान की रकम को व्यवस्थित तरीके से हड़पने का प्रयास किया गया।
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