परिवहन निगम की बसों द्वारा मंसूराबाद बाजार के बाहर से बाईपास होते हुए निकल जाने के कारण यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रात के समय बसें बाजार में प्रवेश न कर सीधे बाईपास पर यात्रियों को उतार देती हैं, जहांअंधेरा और सन्नाटा पसरा रहता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाईपास पर न तो पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था है और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम। खासकर महिलाएं, बुजुर्ग और अकेले यात्रा करने वाले यात्री खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।
यात्रियों का आरोप है कि उन्होंने कई बार परिवहन निगम के अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन से इसकी शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बस चालकों का कहना है कि उन्हें उच्चाधिकारियों के निर्देश हैं कि वे बाईपास से ही बस निकालें, जिससे समय और ईंधन की बचत होती है।
लखनऊ से इलाज करा कर वापस घर आ रहे मेरे 75 वर्षीय बुजुर्ग पिता को गत दिनों परिचालक ने रात में बाईपास पर उतार दिया था। जबकि मंसूराबाद में प्रयाग डिपो की बसों का ठहराव है। - तीरथ लाल केसरवानी, क्षेत्र पंचायत सदस्य
मंसूराबाद बाईपास पर हाईमास्ट लाइट की स्थापना की गई थी, लेकिन चोरी हो जाने से अंधेरा सबसे बड़ी मुसीबत है। इसलिए वहां पर पिकेट ड्यूटी जरूरी है। -राजेश शुक्ल
बाजार में बसों का ठहराव हमेशा होता रहा। जब से बाईपास बना है सारी बसें बाहर से जाती हैं। इससे सबसे ज्यादा कारोबारियों को लूट का डर रहता है।-बलराम सोनी
परिवहन निगम में क्षेत्रीय प्रबंधक से बात कर समस्या का जल्द निस्तारण कराया जाएगा। किसी कारोबारी या यात्री को अनावश्यक परेशानी न होना पड़े, इसके लिए सावधानी बहुत जरूरी है।- गुरु प्रसाद मौर्य, विधायक