कोरोना संकट के बीच सांसद और विधायक निधि से होने वाले कार्यों की प्राथमिकता भी बदलेगी। शासन का निर्माण कार्यों पर अधिक जोर है। इसके मद्देनजर सांसदों, विधायकों के अलावा संबंधित विभागों को पत्र लिखा गया है। इसका मकसद अधिक से अधिक मजदूरों को रोजगार देना है।
सांसदों और विधायकों को पहले से मिले बजट के करोड़ों रुपये अभी खर्च नहीं हुए हैं। सांसद डॉ.रीता बहुगुणा जोशी के फंड में 75 लाख तथा केशरी देवी के पास एक करोड़ रुपये से अधिक राशि शेष है। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2019-20 की दूसरी किस्त भी मिलनी है। इसी तरह से विधायक निधि में भी करोड़ों रुपये बचे हैं। दोनों सांसदों की ओर से करीब चार-चार करोड़ रुपये के प्रस्ताव भेजे गए हैं लेकिन आगामी दो वर्ष तक सांसद निधि जारी नहीं होगा। ऐसे में राशि की उपलब्धता को देखते हुए सांसदों और विधायकों को नए सिरे से कार्यों की प्राथमिकता तय करनी होगी। वहीं शासन की ओर से इंटरलॉकिंग, शहीदों के नाम पर बनने वाले प्रवेश द्वार, सड़क, नाला जैसे निर्माण कार्यों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। ताकि, अधिक मजदूरों को काम मिल सके।
एक लाख से अधिक मजदूरों को अब भी मदद का इंतजार
सरकार की योजना के अंतर्गत करीब एक लाख मजदूरों को एक-एक हजार रुपये की आर्थिक मदद पहुंचाई गई है लेकिन इससे कहीं अधिक श्रमिकों को अब भी मदद का इंतजार है। श्रम विभाग में ही पंजीकृत श्रमिकों को फिलहाल इस योजना का लाभ मिलता नहीं दिख रहा। इन्होंने पंजीकरण का नवीनीकरण ही नहीं कराया है।
करेली में मुफ्त राशन नहीं मिलने की शिकायत
करेली के लोगों की मुफत राशन नहीं मिलने की शिकायत है। निवासियों का कहना है कि कोटेदार ने अप्रैल के पहले पखवारे में किसी भी दिन मुफत राशन नहीं दिया। पैसा लेकर राशन वितरित किया।